घटना के पीछे पाकिस्तान की साजिश का शक
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़ः हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ में नए साल के दिन एक पुलिस स्टेशन के पास हुए आईईडी विस्फोट ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। पंजाब पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों को इस हमले के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ होने का गहरा संदेह है। इस बीच, प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल और पंजाब सोवरेनिटी अलायंस ने एक कथित प्रेस नोट जारी कर इस हमले की जिम्मेदारी ली है। उनका दावा है कि यह हमला हिमाचल प्रदेश से पंजाब में भेजी जा रही सिंथेटिक ड्रग्स के विरोध में किया गया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस हमले की योजना अमेरिका में बैठे कट्टरपंथी गोपी नवांशहरिया और उसके सहयोगी कबल सिंह ने बनाई थी। नवांशहरिया इससे पहले पंजाब में पुलिस प्रतिष्ठानों पर हुए कई हमलों की जिम्मेदारी भी ले चुका है।
कथित नोट में चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन ने नशीले पदार्थों के कारोबार पर लगाम नहीं लगाई, तो अगली बार पुलिस के वाहनों और मुख्यालयों को निशाना बनाया जाएगा। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का मानना है कि नशीले पदार्थों का कारण केवल एक मुखौटा है; वास्तव में इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली के उत्तर-पश्चिम और जम्मू-कश्मीर के दक्षिण वाले इस संवेदनशील क्षेत्र में अस्थिरता और भय पैदा करना है।
विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि घटनास्थल से 400-500 मीटर दूर तक की इमारतों की खिड़कियां चटक गईं। गनीमत रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। हिमाचल और पंजाब पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
फॉरेंसिक टीमों ने विस्फोट स्थल से रसायनों के नमूने एकत्र किए हैं ताकि आईईडी की बनावट और इस्तेमाल किए गए विस्फोटक की पहचान की जा सके। नालागढ़-बद्दी का इलाका भारत का एक प्रमुख फार्मास्यूटिकल हब है, इसलिए यहां सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों को डर है कि विदेशी आका स्थानीय युवाओं को पैसों का लालच देकर ऐसी आतंकी घटनाओं में शामिल कर रहे हैं।