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सीजीएसटी रिश्वत कांड का पर्त दर पर्त खुलासा

डिप्टी कमिश्नर समेत पांच जेल में, अब बड़े कारोबारियों पर नजर

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः झांसी स्थित केंद्रीय माल एवं सेवा कर विभाग में सामने आए करोड़ों के रिश्वत कांड ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। सीबीआई की लखनऊ एंटी करप्शन ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए आईआरएस अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी सहित पांच आरोपियों को 13 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। यह मामला केवल रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का चूना लगाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा प्रतीत हो रहा है।

जांच के दौरान सीबीआई ने पाया कि करोड़ों रुपये की कर चोरी के एक मामले को रफा-दफा करने के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों और कारोबारियों के बीच लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की डील हुई थी। इस सौदेबाजी के सूत्रधार के रूप में डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी का नाम सामने आया है, जिन्होंने अपने अधीनस्थों—सुपरवाइजर अनिल तिवारी और अजय शर्मा—के माध्यम से रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 70 लाख रुपये मंगवाए थे। सीबीआई ने जाल बिछाकर दोनों अधीक्षकों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया, जिसके बाद प्रभा भंडारी को उनके दिल्ली स्थित आवास से हिरासत में लिया गया।

इस भ्रष्टाचार के खेल में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि निजी क्षेत्र के लोग भी सक्रिय रूप से शामिल थे। गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगतानी और जीएसटी मामलों के वकील नरेश गुप्ता शामिल हैं। सीबीआई अब इस मामले में नामजद दो अन्य प्रमुख कारोबारियों—लोकेश तोलानी (जय अम्बे प्लाईवुड) और तेजपाल मंगतानी—के खिलाफ ठोस साक्ष्य जुटा रही है। इनकी गिरफ्तारी भी जल्द होने की संभावना है।

सीबीआई की छापेमारी केवल झांसी तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिल्ली और ग्वालियर स्थित ठिकानों पर भी दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह डीलिंग पिछले आठ दिनों से चल रही थी, जिसे सीबीआई ने स्थानीय पुलिस या विभाग की मदद लिए बिना पूरी तरह गोपनीय तरीके से ट्रैक किया। पूछताछ में कई ऐसे अहम सुराग मिले हैं, जो झांसी के व्यापारिक जगत और कर अधिकारियों के बीच गहरे भ्रष्टाचार के गठजोड़ की ओर इशारा करते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों का खुलासा होने की उम्मीद है।