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खनन माफिया की भेंट चढ़े पहाड़ और ऐतिहासिक धरोहर

अरावली रेंज का पूरा अस्तित्व ही संकट में

राष्ट्रीय खबर

जयपुरः अरावली की पहाड़ियों पर अवैध खनन की विचलित करने वाली तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर स्थित खेरागढ़ के कुल्हाड़ा गांव में जब प्रशासनिक अधिकारियों की टीम निरीक्षण के लिए पहुंची, तो वहां का दृश्य भयावह था। कभी ऊंचे नजर आने वाले पहाड़ अब गहरी खाइयों और मलबे में तब्दील हो चुके हैं। एडीएम (वित्त) शुभांगी शुक्ला के नेतृत्व में हुई इस छापेमारी के दौरान अवैध खनन में लगे मजदूर और कर्मचारी मशीनों को चालू हालत में ही छोड़कर भाग खड़े हुए।

जांच में पाया गया कि राजस्थान सीमा में धड़ल्ले से क्रेशर चलाए जा रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश की सीमा में पहाड़ों को काट-काटकर समतल कर दिया गया है। कई स्थानों पर तो पहाड़ों के अस्तित्व को ही मिटाकर जमीन के भीतर तक गहरी खुदाई कर दी गई है, जहाँ अब वर्षा का जल जमा होकर खतरनाक गड्ढे बन चुके हैं। एडीएम ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यूपी की सीमा में हालिया विस्फोट के प्रमाण नहीं मिले हैं, लेकिन राजस्थान की ओर से हो रहे अवैध खनन ने पारिस्थितिकी तंत्र को भारी क्षति पहुँचाई है। अब उत्तर प्रदेश प्रशासन राजस्थान के अधिकारियों को पत्र लिखकर अरावली के संरक्षण के लिए संयुक्त कार्रवाई की मांग करेगा।

खनन की इस भेंट केवल प्रकृति ही नहीं, बल्कि आस्था और स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी चढ़ी है। कुल्हाड़ा गांव की चोटी पर स्थित प्राचीन ग्वाल बाबा मंदिर अब विनाश की कगार पर है। साल 2016 में माफियाओं ने मुख्य मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद भारी विरोध के कारण उसे कुछ दूरी पर स्थानांतरित किया गया। स्थानीय निवासी पप्पू तोमर बताते हैं कि पहले जहाँ मंदिर तक सीधा रास्ता था, वहां अब केवल गहरी खाइयां बची हैं।

इसके अलावा, अवैध खनन के लिए किए जाने वाले शक्तिशाली विस्फोटों ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। बारूद की धमक से कुल्हाड़ा गांव के दर्जनों मकानों में दरारें आ गई हैं और कुछ घरों की छतें तक गिर चुकी हैं। रात भर चलने वाली क्रेशर मशीनों और गिट्टी लदे ट्रकों ने इलाके की शांति और पर्यावरण को नष्ट कर दिया है। प्रशासन ने अब ड्रोन सर्वे और पुलिस की निरंतर निगरानी के जरिए इस माफिया राज पर नकेल कसने की योजना बनाई है।