बैठक में टीएमसी सांसद की मुख्य चुनाव आयुक्त से टक्कर
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निर्वाचित प्रतिनिधि बनाम मनोनीत अधिकारी
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तकनीक के जरिए वोट चोरी का दावा
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बंगाल को निशाना बनाने का आरोप
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने निर्वाचन सदन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ एक मैराथन बैठक के बाद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। करीब ढाई घंटे तक चली इस गरमागरम मुलाकात के बाद बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाया कि देश में अब चुनावी धांधली का स्वरूप बदल गया है। उनके अनुसार, अब ईवीएम के बजाय सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम का इस्तेमाल कर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर की जा रही है।
अभिषेक बनर्जी ने बैठक के भीतर हुए तनावपूर्ण माहौल का खुलासा करते हुए दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने बातचीत के दौरान उन पर उंगली उठाकर बात करने का प्रयास किया। बनर्जी ने कहा, मैंने उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी कि वे अपनी उंगली नीचे रखें। वे एक मनोनीत अधिकारी हैं, जबकि हम जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। हम किसी के गुलाम नहीं हैं। टीएमसी नेता ने सीईसी को चुनौती दी कि यदि आयोग में साहस है, तो वह बैठक की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करे।
विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि ईसीआई के ऐप में जानबूझकर खामियाँ रखी गई हैं। उन्होंने दावा किया कि 1.36 करोड़ मामलों में तार्किक विसंगतियों की बात कही जा रही है, लेकिन इसकी पारदर्शी सूची साझा नहीं की गई। उनका आरोप है कि अधिकारियों की जानकारी के बिना सॉफ्टवेयर के माध्यम से नाम हटाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की जड़ों पर प्रहार है।
बनर्जी ने केंद्र पर पश्चिम बंगाल को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि रोहिंग्या और घुसपैठियों के नाम पर राज्य की छवि खराब की जा रही है। उन्होंने विपक्षी दलों—कांग्रेस, आप और आरजेडी—को आगाह किया कि वे केवल ईवीएम पर ध्यान न दें, बल्कि देखें कि कैसे वोटर लिस्ट के जरिए हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में नतीजों को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, पहले जनता सरकार चुनती थी, अब सरकार चुन रही है कि वोट कौन डालेगा।