Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Himachal Crime: 'बेरोजगार, ऊपर से बीवी की कमाई...', ताने से भड़के पति ने पत्नी का गला रेता, फिर की ख... Supreme Court on Disability Pension: 'रोज 10 बीड़ी पीने से आया स्ट्रोक', पूर्व सैनिक की याचिका खारिज Punjabi Wedding Viral Video: क्या शादी में सच में उड़ाए 8 करोड़? जानिए नोटों की बारिश का सच Delhi Crime: 'पापा मुझे बचा लो...', बेटे की गुहार सुनकर दौड़े पिता को हमलावरों ने मारी गोली, मौत Shivpal Yadav on Brajesh Pathak: चोटी विवाद पर शिवपाल का डिप्टी सीएम पर वार, बोले- पाप तो आपको भी लग... Vaishno Devi Ropeway Protest: कटरा में भारी बवाल, बाजार बंद और होटलों के बाहर लगे विरोध के पोस्टर पृथ्वी की सतह के नीचे मिला अदृश्य महासागर मस्तिष्क के रहस्यमयी चौकीदार की पहचान हुई सोनम वांगचुक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकारा राफेल विमानों सौदे पर टिकीं दुनिया की नजरें

किसी ने साजिश के तहत माजूली जंगल को जलाया

देश के पर्यावरण के लिए अत्यंत दुखद खबर आयी

  • जादव पायेंग ने इसे तैयार किया था

  • अनेक वर्षों की तपस्या पर पानी फिरा

  • पेड़, पौधे और पक्षियों के अंडे भी जल गये

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी/माजुली: असम के माजुली से साल के अंत में एक ऐसी खबर आई है जिसने न केवल पर्यावरण प्रेमियों को बल्कि पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है। भारत के फॉरेस्ट मैन के रूप में विश्व विख्यात पद्म श्री जादव पायेंग द्वारा अपने हाथों से तैयार किए गए मोलाई फॉरेस्ट रिजर्व के एक नए हिस्से में 28 दिसंबर, 2025 को भीषण आग लगा दी गई। यह आग कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश जान पड़ती है, जिसने सालों की तपस्या को चंद घंटों में खाक कर दिया।

जादव पायेंग और उनकी बेटी मुनमुन पायेंग ने साल 2021 से मूल मोलाई जंगल के पास ही एक छोटी सी जलधारा के पार, बंजर रेतीली जमीन पर एक नया जंगल उगाना शुरू किया था। यहाँ वे प्रतिदिन पौधे लगा रहे थे। 28 दिसंबर की सुबह करीब 11:25 बजे इस इलाके से धुआं उठता देखा गया। मुनमुन पायेंग जब तक मौके पर पहुँचीं, आग विकराल रूप ले चुकी थी।

बिना किसी बाहरी मदद के, उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर घंटों मशक्कत के बाद दोपहर करीब 2:30 बजे आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सब कुछ तबाह हो चुका था। मुनमुन के अनुसार, लगभग 5,000 से अधिक नए पौधे राख हो गए, पक्षियों के घोंसले और अंडे जल गए, और कई छोटे जंगली जीव इस आग में फंसकर अपनी जान गंवा बैठे।

हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों और पायेंग के परिवार को संदेह है कि यह अवैध बालू खनन माफिया की करतूत है। ब्रह्मपुत्र नदी के कोकिलामुख से लेकर तटबंध संख्या 8 तक बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है।

जादव पायेंग लगातार इस प्राकृतिक विनाश का विरोध कर रहे थे और अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील कर रहे थे। माना जा रहा है कि पायेंग की सक्रियता से नाराज माफिया ने उन्हें डराने के लिए इस जघन्य कांड को अंजाम दिया है। बताया जा रहा है कि एक कुवैत स्थित व्यवसायी के डंपर रात के अंधेरे में यहाँ से बालू की चोरी करते हैं।

घटना की गंभीरता को देखते हुए असम के वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने पायेंग परिवार से फोन पर बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि क्षेत्र में अवैध खनन को तुरंत रोका जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह घटना एक दर्दनाक अनुस्मारक है कि प्रकृति को बचाने की लड़ाई आज भी कितनी एकाकी और जोखिम भरी है। जिस व्यक्ति ने दुनिया को यह सिखाया कि एक अकेला इंसान भी पूरा जंगल खड़ा कर सकता है, आज उसी के संरक्षण में देश विफल होता दिख रहा है।