म्यांमार में 5 साल बाद दिखावे का चुनाव
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सैन्य समर्थक पार्टी ही मैदान में
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शेष दलों ने इससे दूरी बनायी है
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सैन्य शासन को नया रुप देने की कोशिश
बैंकॉकः म्यांमार में रविवार को कड़ी सुरक्षा और प्रतिबंधों के बीच मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई। सत्तारूढ़ सैन्य जुंटा इस अभ्यास को लोकतंत्र की वापसी के रूप में प्रचारित कर रहा है। गौरतलब है कि पांच साल पहले सेना ने निर्वाचित सरकार का तख्तापलट कर दिया था, जिसके बाद देश भीषण गृहयुद्ध की चपेट में आ गया था।
इस चुनाव में पूर्व नागरिक नेता आंग सान सू की अनुपस्थित हैं, जो फिलहाल जेल में हैं। उनकी लोकप्रिय पार्टी को भी सेना द्वारा भंग कर दिया गया है, जिस कारण वह चुनाव में भाग नहीं ले पा रही है। इससे साफ है कि सैन्य शासन सिर्फ दिखावे के लिए इस चुनाव का आयोजन कर रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पश्चिमी राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने इस एक महीने तक चलने वाले मतदान की निंदा की है।
उनका कहना है कि यह चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से सेना के सहयोगियों के पक्ष में झुकी हुई है और इसमें असहमति जताने वालों पर भारी कार्रवाई की जा रही है। आलोचकों का मानना है कि यह चुनाव केवल सैन्य शासन को एक नया रूप देने की कोशिश है। उम्मीद की जा रही है कि सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरेगी, क्योंकि अधिकांश विपक्षी दल या तो प्रतिबंधित हैं या चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं।
म्यांमार के कई हिस्सों में अभी भी जुंटा सेना और जातीय विद्रोही समूहों के बीच संघर्ष जारी है, जिससे कई क्षेत्रों में मतदान कराना असंभव हो गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इन चुनावों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानकारों का कहना है कि सू की और उनकी पार्टी की अनुपस्थिति में यह चुनाव समावेशी नहीं हो सकते। म्यांमार की जनता के बीच भी इस चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहुत कम उत्साह देखा गया, और मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या काफी कम रही। यह चुनाव म्यांमार के भविष्य और वहां लोकतंत्र की बहाली की संभावनाओं पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है।