Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Mumbai Mayor Election: मुंबई में फिर 'खेला'! शिवसेना (UBT) और भाजपा आए साथ? शिंदे गुट की बढ़ी टेंशन, ... नीले बक्से का खौफनाक राज! प्रीति की 'डिमांड' ने ली जान? पत्नी के शव के टुकड़े कर रोज जलाता था हैवान ... Crime in Train: नशीला लड्डू खिलाकर मां को किया बेहोश, ट्रेन से 10 महीने का बच्चा चोरी; पुलिस ने शुरू... Atishi vs BJP: 'दिल्ली में बेलगाम अपराध के लिए भाजपा जिम्मेदार', मुख्यमंत्री आतिशी ने महिला सुरक्षा ... जयपुर-दिल्ली हाईवे पर 'मौत' का तांडव! टैंकर और ट्रेलर की भिड़ंत के बाद केमिकल रिसाव से लगी भीषण आग, ... दिल्ली में दमघोंटू प्रदूषण और कोहरे की दोहरी मार! AQI 400 के पार पहुंचा, मौसम विभाग ने जारी किया 'ये... Startup India Ranking: उत्तराखंड बना 'स्टार्टअप लीडर' स्टेट, केंद्र सरकार की रैंकिंग में राज्य को मि... कर्नाटक में मचेगा सियासी बवाल? दिल्ली पहुंचे डीके शिवकुमार का बड़ा बयान- 'अब तो समय ही सब बताएगा', क... हैवानियत की हद! पति बोला- 'दोस्तों से रिलेशन बनाओ वरना बेच दूंगा', पुलिस के सामने फफक कर रो पड़ी पत्न... Rajasthan Crime: राजस्थान में एक गोत्र में शादी के विवाद में प्रेमी जोड़े ने दी जान, 15 दिनों तक पेड...

नीतीश के कैबिनेट का विस्तार की जोरों से चर्चा

नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मुलाकात के बाद होगा फैसला

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बिहार की सियासत में नए साल के साथ ही प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकती है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति के शुभ अवसर के पश्चात मंत्रिपरिषद में खाली पड़े स्थानों को भरा जाएगा।

इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य शासन को और अधिक प्रभावी बनाना और सहयोगी दलों के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। वर्तमान में नीतीश सरकार में कुल 10 पद रिक्त हैं, जिनमें से 6 पद जनता दल यूनाइटेड और 4 पद भारतीय जनता पार्टी के कोटे के माने जा रहे हैं।

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, बिहार विधानसभा की सदस्य संख्या के आधार पर मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। एनडीए के भीतर तय किए गए फार्मूले के तहत भाजपा को 17, जदयू को 15, लोजपा (रामविलास) को 2 और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा व रालोमो को एक-एक मंत्री पद आवंटित होना है।

मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए सरकार की कोशिश सामाजिक और जातिगत समीकरणों को साधने की भी होगी। विशेष रूप से कुशवाहा समुदाय और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को उचित प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि आगामी चुनावों से पहले जनाधार को और मजबूत किया जा सके।

वर्तमान स्थिति यह है कि कई वरिष्ठ मंत्रियों पर एक साथ कई महत्वपूर्ण विभागों का बोझ है। जदयू के वरिष्ठ नेता विजेंद्र यादव और विजय चौधरी जैसे मंत्रियों के पास कई पोर्टफोलियो हैं। इसी तरह भाजपा कोटे के मंत्रियों के पास भी अतिरिक्त प्रभार हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से इन विभागों का पुनर्वितरण किया जाएगा ताकि जनहित के कार्यों में गति आ सके।

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने प्रचंड बहुमत हासिल किया था, जिसमें भाजपा और जदयू का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा था। अब इस राजनीतिक सफलता को सुशासन में बदलने के लिए नीतीश कुमार अपनी टीम को अंतिम रूप देने की तैयारी में हैं।