बचाव दल का हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, पांच मरे
डोडोमाः अफ्रीका के सबसे ऊंचे पर्वत, माउंट किलिमंजारो पर आज एक ऐसी घटना घटी जिसने पर्वतारोहण जगत को शोक में डुबो दिया। एक साहसी चिकित्सा बचाव अभियान उस समय त्रासदी में बदल गया जब एक हेलीकॉप्टर बाराफू कैंप के समीप चट्टानी ढलानों से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
तंजानिया नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि इस हृदयविदारक हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सभी 5 सदस्यों की मृत्यु हो गई है। मरने वालों में दो अनुभवी पायलट और तीन समर्पित पैरामेडिकल कर्मचारी शामिल थे, जो अपनी जान जोखिम में डालकर एक विदेशी पर्वतारोही की मदद के लिए जा रहे थे।
यह बचाव अभियान तब शुरू हुआ था जब एक पर्वतारोही ने लगभग 15,000 फीट की ऊंचाई पर हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी) और तीव्र पर्वतीय बीमारी के लक्षण विकसित किए थे। हेलीकॉप्टर ने प्रतिकूल परिस्थितियों में उड़ान भरी थी, लेकिन गंतव्य के करीब पहुँचते ही अचानक मौसम बिगड़ गया।
घने कोहरे और तेज बर्फीली हवाओं के कारण पायलट को शायद दृश्यता की समस्या हुई, जिससे हेलीकॉप्टर का संतुलन बिगड़ गया। प्रत्यक्षदर्शी पोर्टर्स (कुलियों) ने बताया कि उन्होंने एक जोरदार धमाका सुना और फिर पहाड़ की ओट से धुआं उठता देखा। दुर्घटना स्थल की दुर्गम भौगोलिक स्थिति और शून्य से नीचे के तापमान ने राहत कार्य को अत्यंत कठिन बना दिया।
तंजानिया के पर्यटन और प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय ने मृतकों को हीरो करार देते हुए कहा कि उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह हादसा पर्वतारोहण पर्यटन के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि किलिमंजारो पर बचाव कार्यों के लिए यही टीम सबसे प्रमुख थी। हेलीकॉप्टर के ब्लैक बॉक्स की तलाश की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई तकनीकी खराबी थी या यह पूरी तरह से मौसम का प्रकोप था। इस घटना के बाद किलिमंजारो पर चढ़ाई के सुरक्षा प्रोटोकॉल और हेलीकॉप्टर उड़ानों के मानकों पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।