गुजरात विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का इस्तीफा
राष्ट्रीय खबर
अहमदाबाद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्य विधानसभा के उपाध्यक्ष जेठाभाई अहीर भारवाड़ ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। इस अचानक हुए इस्तीफे ने न केवल भाजपा संगठन के भीतर बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। जेठाभाई ने अपना आधिकारिक इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी को उनके निवास पर जाकर सौंपा, जिसे तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है।
इस्तीफे के पीछे का आधिकारिक और राजनीतिक तर्क जेठाभाई भारवाड़ ने अपने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत और कार्यभार से जुड़े कारणों का हवाला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नाफेड जैसी राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं और अन्य स्थानीय सहकारी संगठनों में अपनी सक्रियता बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, वे अपने निर्वाचन क्षेत्र, अब्दासा के विकास कार्यों और जनता की समस्याओं को अधिक समय देना चाहते हैं। गौरतलब है कि जेठाभाई मध्य गुजरात के एक कद्दावर सहकारी नेता माने जाते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर उनकी गहरी पकड़ है। सहकारिता क्षेत्र में उनके बढ़ते कद को देखते हुए यह तर्क तार्किक लगता है, परंतु राजनीतिक विश्लेषक इसके पीछे अन्य संभावनाओं को भी तलाश रहे हैं।
हालांकि आधिकारिक तौर पर सब कुछ सामान्य दिख रहा है, लेकिन चर्चा यह भी है कि भाजपा संगठन के भीतर चल रहे हालिया फेरबदल से जेठाभाई शायद पूरी तरह सहज नहीं थे। कुछ सूत्रों का कहना है कि आगामी चुनावों और सांगठनिक मजबूती को देखते हुए पार्टी नेतृत्व किसी नए चेहरे को विधानसभा के इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर लाना चाहता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस्तीफा देते समय मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री रत्नाकरजी की उपस्थिति मौजूद थी। शीर्ष नेतृत्व की यह मौजूदगी इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करती है कि यह इस्तीफा कोई व्यक्तिगत विद्रोह नहीं, बल्कि हाईकमान द्वारा तय की गई एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
रिक्त पद और भविष्य के समीकरण जेठाभाई भारवाड़ के हटने से अब विधानसभा उपाध्यक्ष की कुर्सी रिक्त हो गई है। भाजपा अब इस पद के जरिए किसी अन्य जातीय या क्षेत्रीय समीकरण को साधने की कोशिश कर सकती है। गुजरात में अगले कुछ समय में होने वाले संगठनात्मक बदलावों के बीच यह इस्तीफा एक बड़ी तस्वीर का छोटा हिस्सा मात्र हो सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी जेठाभाई को सहकारिता क्षेत्र में क्या नई बड़ी जिम्मेदारी सौंपती है और विधानसभा उपाध्यक्ष की गद्दी पर किसकी ताजपोशी होती है।