तोशाखाना मामले में अदालत का फैसला आने के बाद नाराज
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दोनों को सत्रह साल के कारावास की सजा मिली
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पूर्व पीएम ने इस फैसले को राजनीतिक बताया
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समर्थकों से सड़क पर उतरने की अपील जारी की
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार मामले में 17 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। शनिवार को आए इस फैसले ने पाकिस्तान के राजनीतिक भविष्य पर फिर से अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। अदालत ने न केवल जेल की सजा सुनाई, बल्कि पूर्व प्रथम दंपत्ति पर भारी जुर्माना भी लगाया है। यह मामला 2021 में सऊदी अरब सरकार से मिले बेशकीमती उपहारों की कम कीमत आंकने और उन्हें निजी लाभ के लिए अवैध रूप से रखने या बेचने से संबंधित है।
अडियाला जेल से विद्रोह का बिगुल 73 वर्षीय इमरान खान, जो अगस्त 2023 से रावलपिंडी की कड़ी सुरक्षा वाली अडियाला जेल में बंद हैं, ने इस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। अपने वकीलों के माध्यम से जारी एक कड़े संदेश में उन्होंने इस अदालती कार्यवाही को मिलिट्री-स्टाइल ट्रायल करार दिया। खान ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया और फैसला जल्दबाजी में सुनाया गया। उन्होंने अपने समर्थकों और पूरी पाकिस्तानी कौम से अपील की है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरें। खान ने इसे पाकिस्तान की हकीकी आजादी (सच्ची आजादी) का निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि वे इस उद्देश्य के लिए शहादत देने को भी तैयार हैं।
प्रताड़ना के आरोप और कानूनी लड़ाई इमरान खान ने जेल प्रशासन और मौजूदा सरकार पर उन्हें और बुशरा बीबी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है और टीवी, किताबों तथा परिजनों से मिलने जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया गया है, जो अन्य कैदियों को आसानी से उपलब्ध हैं। खान ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे राज्य स्तर पर एक बड़े जन-आंदोलन की तैयारी शुरू करें।
सेना के साथ प्रेम और घृणा का संबंध दिलचस्प बात यह है कि खान ने एक ओर सैन्य नेतृत्व की कड़ी आलोचना की, तो दूसरी ओर सेना मेरी है कहकर एक भावनात्मक कार्ड भी खेला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सेना के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ जनभावना भड़काने और निचले सैन्य कैडर की सहानुभूति हासिल करने की एक सोची-समझी रणनीति है। इमरान खान की कानूनी टीम ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता के बीच, इमरान खान की यह नई सजा देश को एक और हिंसक प्रदर्शन की ओर धकेल सकती है।