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सोनम रघुवंशी ने शिलांग कोर्ट से मांगी जमानता, राजा रघुवंशी के भाई ने ली आपत्ति

इंदौर। ट्रांसपोर्टर राजा रघुवंशी हत्याकांड में शिलांग जेल में बंद सोनम रघुवंशी ने जमानत मांगी है। राजा (Raja Raghuvanshi Murder Case) के भाई विपिन रघुवंशी ने जमानत पर आपत्ति ली है। कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ा दी है। सहकार नगर (केट रोड) निवासी 30 वर्षीय राजा की उसकी पत्नी सोनम ने प्रेमी राज कुशवाह और आकाश, विशाल व एक अन्य के साथ मिलकर शिलांग में हनीमून के दौरान हत्या कर दी थी।

सभी आरोपित मेघालय (Meghalaya Murder Mystery) में शिलांग की जेल में बंद हैं। आरोपियों की तरफ से सरकारी वकील पैरवी कर रहे हैं। बुधवार को सोनम रघुवंशी की तरफ से उसके वकील ने जमानत अर्जी दायर कर दी। जानकारी लगने पर विपिन ने आपत्ति दर्ज करवाई। उसने कोर्ट से कहा कि सोनम ने दो परिवारों के साथ धोखा किया है। राजा से शादी के पहले ही वह राज से शादी कर चुकी थी। उसे जमानत नहीं देनी चाहिए।

इंदौर में ट्रक हादसे पर कोर्ट ने कहा- सिर्फ रिपोर्ट पेश करने से कुछ नहीं होगा, इसे व्यवहार में लाएं

सिर्फ रिपोर्ट पेश करने से हादसे नियंत्रित नहीं होंगे। इसमें जो उपाय बताए गए हैं, उन्हें नियमित व्यवहार में भी लाएं। यह टिप्पणी हाई कोर्ट की मुख्य पीठ ने की। न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार से पूछा था कि वह बताए कि इंदौर में हुए ट्रक हादसे के बाद उसने सुधार के लिए क्या प्रयास किए हैं। बुधवार को शासन की ओर से रिपोर्ट पेश हो गई। इसे रिकार्ड पर लेते हुए कोर्ट ने शासन से कहा कि रिपोर्ट में इंगित किए गए उपायों को व्यवहार में भी लाएं। मामले में अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।

पिछली सुनवाई में इंदौर के पुलिस आयुक्त वीसी के माध्यम से उपस्थित हुए थे। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि शहर में उक्त हादसे के बाद कोई भीषण सड़क दुर्घटना नहीं हुई है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुधारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। इस जानकारी को अधूरी बताते हुए कोर्ट ने इंदौर में सड़क हादसों को रोकने के संबंध में समग्र सुधारात्मक प्रयासों की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। इसी आदेश के पालन में शासन ने बुधवार को उक्त रिपोर्ट पेश की। इसमें हादसे के बाद से एक के बाद एक उठाए गए मूलभूत कदमों की जानकारी दी गई।

उन प्रयासों को रेखांकित किया गया, जिनके जरिए इस तरह के हादसों की आशंका को निर्मूल किया जा सकता है। रिपोर्ट में अवगत कराया गया कि सड़क सुरक्षा संबंधी जितने भी नियम पूर्व से अस्तित्व में हैं, उनका गंभीरता से पालन सुनिश्चित कराने की योजना बनाई गई है। कोर्ट ने रिपोर्ट में शामिल बिंदुओं के आधार पर निरंतर सावधानी बरतने के दिशा-निर्देश दे दिए।

संज्ञान आधारित जनहित याचिका

उल्लेखनीय है कि 15 सितंबर की शाम एयरपोर्ट इलाके की सड़कों पर ट्रक ने करीब एक किलोमीटर तक तेज रफ्तार में कई लोगों और वाहनों को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। इंदौर में नो एंट्री में ट्रक के कोहराम मचाने की घटना को संज्ञान में लेते हुए हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान याचिका दर्ज की है। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से पूछा था कि यह गंभीर चूक कैसे हुई। कोर्ट ने यह बताने का भी कहा था कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए क्या योजना है।

हाई कोर्ट ने गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए अपनी टिप्पणी में कहा था कि जब सड़क सुरक्षा के सख्त नियम मौजूद हैं तो इस तरह के हादसे होना अत्यंत चिंताजनक है। प्रकरण की पूर्व में सुनवाई के दौरान इंदौर के पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर वर्चुअली और ट्रैफिक डीसीपी व्यक्तिगत रूप से हाजिर हुए थे। इसके बाद जनहित याचिका को इंदौर बेंच स्थानांतरित कर दिया गया था।

इंदौर बेंच से पुनः याचिका को मुख्य पीठ स्थानांतरित की गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र की तरफ से बताया गया था कि इस हादसे के बाद भी इंदौर में ऐसी दुर्घटनाएं हो गई हैं, जिसे गंभीरता से लेते हुए हाई कोर्ट ने इंदौर पुलिस आयुक्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे।