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दिल्ली को ‘गैस चैंबर’ बनाने के जिम्मेदार कौन? गाड़ियां, धूल या इंडस्ट्री- जानें प्रदूषण के स्रोतों का पूरा ब्रेकअप

मशहूर शायर शहरयार की गज़ल है… सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यूं है, इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूं है, ये गजल अगर आज लिखी जाती तो दिल्ली-NCR में रहने वालों के लिए ही होती क्योंकि रोज रिकॉर्ड तोड़ रहे प्रदूषण ने दिल्ली वालों का यही हाल कर दिया. NCR में प्रदूषण की ख़बरें रोज हेडलाइन बनती हैं. तमाम दावे भी किए जाते हैं लेकिन पॉल्यूशन वाले इस संकट का कोई सॉल्यूशन नहीं हो पा रहा है.

हाल ये है कि दिल्ली NCR की जहरीली हवा में सांस लेने वालों का दम घुट रहा है लेकिन सिस्टम की आंखों के सामने छाई धुंध हटने का नाम नहीं ले रही है. आज प्रदूषण वाली परेशानी ने नए रेड जोन में एंट्री की. विजिबिलिटी 50 मीटर से कम रही. कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया. जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है.

11 दिसंबर को औसत AQI 416 रहा

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली का जो हाल है उसे देखते हुए कहा जा सकता है, जिस दिन यहां का आसमान साफ दिखेगा उसे एक दुर्लभ घटना माना जाएगा. पिछले 5 दिनों से लगातार हालत बिगड़े हैं. 11 दिसंबर को औसत AQI 416 रहा. आज तो दिल्ली के कई इलाकों में AQI 500 तक दर्ज किया गया. इसका मतलब है कि दिल्ली की हवा बिल्कुल भी सांस लेने लायक नहीं है. दिल्ली वाले रोज़ क़रीब 26 सिगरेट के बराबर धुआं सांसों के साथ अंदर खींचने के लिए मजबूर हैं.

प्रदूषण वाली परेशानी अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. कोर्ट इस पर 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा. आज CJI सूर्यकांत ने कहा कि कुछ निर्देश जबरन लागू किए जा सकते हैं लेकिन शहरी महानगरों में लोग गंभीर प्रदूषण के बाद भी अपनी लाइफस्टाइल नहीं बदलना चाहते हैं, ये नहीं सोचते की गरीबों का क्या होगा. कोर्ट ने कहा कि हम ऐसे आदेश पारित करेंगे जिनका पालन किया जा सके. वैसे दिल्ली में प्रदूषण को लेकर पहले ही कई पाबंदियां लागू हैं, जैसे-

  • 50% कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश
  • 5वीं तक के बच्चों को स्कूलों में ऑनलाइन क्लास
  • सभी तरह के निर्माण कार्यों पर रोक
  • BS-4 वाली डीजल गाड़ियों के दिल्ली में आने पर पाबंदी
  • कचरा या ईंधन जलाना भी मना
  • कोयले वाला तंदूर भी नहीं जलाया जा सकता

दिल्ली में अभी ऐसे ही हालत रहेंगे

एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार दिल्ली में अभी ऐसे ही हालत रहेंगे. मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली में हवा की रफ्तार कम हुई है. हवा की गति, जो 10 किमी प्रति घंटे से कम है. इसकी वजह से हवा में प्रदूषक तत्व जमा हो गए हैं. कोहरे की वजह से ये प्रदूषक तत्व भारी हो जाते हैं. फिर लंबे वक्त तक एक जगह जमा रहते हैं. अगले छह दिनों के लिए भी पूर्वानुमान है कि हवा बहुत खराब कैटेगरी में रहने की संभावना है.

प्रदूषण के असली जिम्मेदार
सड़क की धूल 38%
वाहन 20%
उद्योग 11%
निर्माण कार्य 10%
कचरा जलाना 9%
घरेलू ईंधन 8%
अन्य स्रोत 4%
सोर्स : IIT कानपुर की रिपोर्ट

यानी कई पाबंदियों के बाद भी दिल्ली वालों को तुरंत राहत मिलने की उम्मीद नहीं. IIT कानपुर रिसर्च के मुताबिक दिल्ली में प्रदूषण की सबसे बड़ी ज़िम्मेदार सड़क की धूल है जिससे सबसे ज़्यादा 38% प्रदूषण होता है. इसके बाद 20% प्रदूषण की ज़िम्मेदारी गाड़ियों के धुएं की है. फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं का हिस्सा 11% है. निर्माण कार्यों के कारण लगभग 10 प्रतिशत, कचरा जलाने से 9 प्रतिशत और घरेलू ईंधन जलने से 8 प्रतिशत वायु प्रदूषण होता है.

हर साल 12 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत

ये प्रदूषण से दिल्ली वालों की सांसे भी थम रही हैं, जिससे जुड़े आंकड़े डराने वाला है. रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में हर वर्ष वायु प्रदूषण की वजह 12 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो जाती है. इसका मतलब ये हुआ कि दिल्ली में हर महीने औसतन 1000 लोग और हर दिन औसतन 33 लोग प्रदूषण की वजह से अपनी ज़िंदगी खो रहे हैं.

प्रदूषण बना ‘सीरियल किलर’
दिल्ली में प्रति वर्ष 12,000 से ज़्यादा मौत
दिल्ली में हर महीने 1,000 मौत
दिल्ली में हर दिन 33 मौत
भारत में प्रति वर्ष 21,00,000 मौत

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण की वजह से भारत में लोगों की जीवन उम्र लगातार घट रही है. इसमें सबसे ज़्यादा नुकसान दिल्लीवालों को है. जहां वायुप्रदूषण की वजह से लोगों की उम्र 8 वर्ष कम हो रही है. इसके अलावा बिहार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है.