Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bokaro News: बोकारो में युवक का संदिग्ध शव मिलने से सनसनी, परिजनों ने शराब माफिया पर जताया शक झारखंड में गर्मी का दायरा बढ़ा, चाईबासा सबसे गर्म तो गुमला में सबसे ठंडी रात Hazaribagh News: हजारीबाग के बड़कागांव में बुजुर्ग दंपती की बेरहमी से हत्या, इलाके में दहशत Palamu News: पलामू में शस्त्र लाइसेंसों की समीक्षा शुरू, आपराधिक इतिहास वाले लोगों पर गिरेगी गाज सऊदी अरब में भारतीय की मौत पर बवाल: परिजनों का आरोप- 'पावर ऑफ अटॉर्नी' पर नहीं किए साइन Hazaribagh News: हजारीबाग में हथिनी का आतंक, वन विभाग अब ट्रेंकुलाइज करने की कर रहा तैयारी Bilaspur News: बिलासपुर की पेंट फैक्ट्री में लगी भीषण आग, तिफरा इंडस्ट्रियल एरिया में मचा हड़कंप MCB News: अमृतधारा महोत्सव में छिड़ा सियासी संग्राम, जनप्रतिनिधियों और नेताओं में दिखी भारी नाराजगी Balod News: बालोद में कब्र से दफन बच्ची का सिर गायब, तंत्र-मंत्र की आशंका से इलाके में दहशत Baloda Bazar News: नाबालिग के कंधों पर अवैध शराब का धंधा, दो बड़ी पुलिस कार्रवाइयों में गिरोह बेनकाब

दुनिया के दूसरे इलाकों में भी दिखेगा ठीक ऐसा ही खतरा

तुर्की के कोन्या में 700 सिंकहोल्स का रहस्य

  • जलवायु परिवर्तन का खतरनाक असर

  • जमीन के नीचे चूना पत्थर धंस रहा है

  • अत्यधिक भूजल दोहन से ऐसी हालत है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः तुर्की के मध्य अनातोलिया क्षेत्र में स्थित कोन्या का मैदान जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित जल दोहन के कारण एक गंभीर भूवैज्ञानिक संकट का सामना कर रहा है। यहाँ की जमीन अचानक धँसकर सैकड़ों विशालकाय गड्ढे (सिंकहोल्स) बना रही है, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘ओब्रुक’ कहा जाता है। इन विशालकाय गड्ढों की संख्या अब 700 से अधिक हो चुकी है, जो न केवल कृषि भूमि को निगल रहे हैं बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गए हैं।

यहां क्लिक कर देखें  इसका वीडियो
कोन्या क्षेत्र, जो तुर्की के सबसे बड़े कृषि केंद्रों में से एक है, अपनी सिंचाई की जरूरतों को मुख्य रूप से भूजल से पूरा करता है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में यहाँ पर हुई कम वर्षा और भूजल के अत्यधिक और अनियंत्रित दोहन ने जमीन के नीचे एक खतरनाक खालीपन पैदा कर दिया है।

यह क्षेत्र मुख्य रूप से कार्स्ट स्थलाकृति वाला है, जिसका अर्थ है कि यहाँ की जमीन के नीचे चूना पत्थर की परतें हैं। चूना पत्थर पानी में आसानी से घुल जाता है। प्राकृतिक रूप से, वर्षा का पानी मिट्टी से रिसकर चूना पत्थर को धीरे-धीरे घोलता है, जिससे नीचे भूमिगत गुफाएँ बनती हैं।

जब किसान अत्यधिक मात्रा में भूजल निकालते हैं, तो इन भूमिगत गुफाओं को सहारा देने वाला पानी तेज़ी से कम हो जाता है। पानी के हटने के बाद, ऊपर की मिट्टी की परत का वजन नीचे की खाली गुफाओं पर पड़ता है। पर्याप्त सहारा न मिलने के कारण, ऊपर की ज़मीन अचानक और नाटकीय रूप से धंस जाती है, जिससे गोलाकार सिंकहोल (ओब्रुक) बन जाते हैं।

कोन्या के ओब्रुक कई मीटर चौड़े और गहरे हो सकते हैं। ये गड्ढे खेत की उपजाऊ ज़मीन को रातों-रात गायब कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इन गड्ढों से किसी बड़ी दुर्घटना की खबर नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि ये कभी भी बन सकते हैं और इनसे जान-माल का नुकसान हो सकता है। यह संकट स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन (सूखे के रूप में) और मानव गतिविधियों (अत्यधिक जल दोहन) के घातक संयोजन का परिणाम है।

वैज्ञानिक और सरकारी अधिकारी अब इस समस्या के समाधान के लिए काम कर रहे हैं, जिसमें सतत जल प्रबंधन और स्थानीय कृषि पद्धतियों में बदलाव लाना शामिल है ताकि भूजल स्तर को फिर से स्थिर किया जा सके और इन प्राकृतिक आपदाओं को रोका जा सके। यह घटना दुनिया भर के उन क्षेत्रों के लिए एक चेतावनी है जो अपने भूजल संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर हैं।

#तुर्कीसिंकहोल #कोन्यासंकट #भूजलदोहन #जलवायुआपदा #धरतीकेगड्ढे #TurkeySinkholes #KonyaCrisis #GroundwaterDepletion #ClimateDisaster #EarthHoles