जापान की सीमा के करीब उड़ने परमाणु सक्षम विमान
टोक्योः रूस और चीन के परमाणु-सक्षम बॉम्बर विमानों ने जापान के समुद्री क्षेत्र के पास से एक संयुक्त लंबी दूरी की उड़ान भरी, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर चिंताएँ बढ़ गई हैं। इस सैन्य अभ्यास को दोनों देशों के बीच गहराते रक्षा सहयोग और पश्चिमी देशों के खिलाफ उनकी बढ़ती एकता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
जापान और दक्षिण कोरिया, दोनों ने इन विमानों को अपनी वायु रक्षा पहचान क्षेत्रों के पास आते देखा, जिसके तुरंत बाद उन्होंने अपने लड़ाकू विमानों को एहतियाती तौर पर उतारा। जापान ने इस कदम को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ाने वाला बताते हुए रूस और चीन दोनों के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
संयुक्त अभ्यास में रूस के टीयू 95एमएस और चीन के एच-6 के रणनीतिक बॉम्बर शामिल थे, जो परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या वे इस विशेष उड़ान के दौरान परमाणु-सक्षम थे। इन विमानों ने जापान के समुद्री मार्गों और महत्वपूर्ण जलडमरूमध्यों के पास उड़ान भरी, जिसे विश्लेषक एक स्पष्ट शक्ति प्रदर्शन मानते हैं।
अमेरिका ने भी इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, चेतावनी दी है कि इस तरह की गतिविधियाँ क्षेत्र में तनाव को बढ़ा सकती हैं और गलती से संघर्ष शुरू होने का जोखिम पैदा कर सकती हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि वह अपने सहयोगियों – जापान और दक्षिण कोरिया – की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इन दो महान शक्तियों (रूस और चीन) के सैन्य तालमेल पर बारीकी से नजर रखेगा।
यह संयुक्त सैन्य अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता और यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभ्यास रूस और चीन द्वारा दुनिया को यह संदेश देने का प्रयास है कि वे एक-दूसरे का मजबूती से समर्थन करते हैं और पश्चिमी गठबंधनों के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बना रहे हैं। जापान ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति की समीक्षा करते हुए अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर जोर दिया है, जिसमें मिसाइल रक्षा प्रणाली और जवाबी हमले की क्षमताएँ विकसित करना शामिल है। यह घटना एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शीत युद्ध जैसे नए भू-राजनीतिक विभाजन को दर्शाती है।