यूक्रेन में नये चुनाव पर वर्तमान राष्ट्रपति तैयार
कीवः यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अपने देश में युद्धग्रस्त स्थिति के बावजूद, अगले 90 दिनों के भीतर राष्ट्रपति चुनाव कराने की तैयारी दिखाई है, बशर्ते अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी इसके लिए सुरक्षा गारंटी प्रदान करें। यह घोषणा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा यूक्रेन के लोकतंत्र पर सवाल उठाए जाने और यह तर्क देने के बाद आई है कि देश में युद्ध के नाम पर चुनाव टाले जा रहे हैं।
ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि मतदान की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष हो और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नागरिकों और मतदान अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वर्तमान में, यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू है, जिसके तहत संवैधानिक रूप से चुनाव नहीं कराए जा सकते।
हालांकि, ज़ेलेंस्की ने कहा कि यदि सहयोगी देश इसके लिए आवश्यक वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं, जिसमें हवाई हमले की स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा के लिए बंकरों और सुरक्षित मतदान केंद्रों की व्यवस्था शामिल है, तो मार्शल लॉ में बदलाव किया जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव केवल यूक्रेन के उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहने चाहिए जो सरकार के नियंत्रण में है, बल्कि विदेशों में विस्थापित हुए लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों और फ्रंटलाइन के पास रहने वाले सैनिकों को भी मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। यह एक अत्यंत जटिल और महंगा उपक्रम होगा, क्योंकि युद्ध की सक्रियता के कारण लाखों लोग देश के अंदर ही विस्थापित हैं और बड़ी संख्या में नागरिक विदेशों में शरण लिए हुए हैं।
ज़ेलेंस्की की यह शर्त एक तरह से पश्चिमी सहयोगियों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ, पर एक राजनीतिक दबाव भी है कि वे केवल लोकतंत्र पर सवाल न उठाएँ, बल्कि इसकी स्थापना और संचालन के लिए सक्रिय रूप से सहयोग करें। इस घोषणा ने यूक्रेन के राजनीतिक परिदृश्य में एक नई बहस छेड़ दी है, जहाँ कुछ लोग इसे लोकतंत्र की बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम बता रहे हैं, वहीं कुछ अन्य लोग युद्ध के बीच चुनाव को अनावश्यक जोखिम और संसाधनों की बर्बादी मान रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि चुनाव होते हैं, तो यह यूक्रेन की लोकतांत्रिक दृढ़ता का एक शक्तिशाली प्रदर्शन होगा, लेकिन इसके सफल और सुरक्षित संचालन के लिए वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व समन्वय की आवश्यकता होगी।