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मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) की क्या है प्रगति? बंगाल में 96% फॉर्म वितरण तो UP में 30% मैपिंग अभी बाकी, 12 राज्यों का अपडेट

देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है. SIR के तहत राज्यों में चल रहे फॉर्म वितरण और डिजिटलीकरण दोनों काम तेजी से पूरे किए जा रहे हैं. बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद अब देश के 12 अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है. केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट से पता चलता है कि इन राज्यों में 99.95 प्रतिशत से अधिक फॉर्म मतदाताओं तक पहुंच चुके हैं, जिसमें से 98.69 प्रतिशत फॉर्म का डिजिटलीकरण किया जा चुका है.

चुनाव आयोग की ओर से सोमवार को जानकारी दी गई कि SIR फॉर्म वितरण राष्ट्रीय स्तर पर लगभग पूरा हो चुका है. कुल 50.99 करोड़ पात्र मतदाताओं में से 50.95 करोड़ लोगों को फॉर्म सौंपे जा चुके हैं. यह पूरा अभियान 11 दिसंबर तक जारी रहेगा. फॉर्म वितरण का ये प्रतिशत बताता है कि चुनावी तैयारी में जुटी मशीनरी काफी सक्रिय है और हर जिले में टीमें तय समय पर अपना लक्ष्य हासिल कर लेंगी.

गोवा और लक्षद्वीप जैसे छोटे क्षेत्र पहले ही 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा कर चुके हैं. इनके अलावा अंडमान-निकोबार, मध्य प्रदेश, पडुचेरी, छत्तीसगढ़, गुजरात, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और तमिलनाडु में भी डिजिटलीकरण दर 99 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुकी है. देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भी 99.95 प्रतिशत फॉर्म बांटे जा चुके हैं, जबकि 96.91 प्रतिशत फॉर्म को डिजिटल रिकॉर्ड में डाला जा चुका है. डिजिटल रिकॉर्ड बनाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और 50.33 करोड़ से अधिक फॉर्म डिजिटल रिकॉर्ड में डाले जा चुके हैं.

बंगाल में तेजी से बढ़ी रफ्तार, यूपी में डिजिटल प्रक्रिया धीमी

पश्चिम बंगाल में कुल 7.66 करोड़ फॉर्मों में से लगभग सभी फॉर्म वितरित हो चुके हैं. इसमें से 99 प्रतिशत से अधिक डिजिटलीकरण होने से राज्य का प्रदर्शन देश में सबसे अच्छे राज्यों में शामिल हो गया है. गुजरात और मध्य प्रदेश ने भी वितरण में लगभग पूर्णता हासिल कर ली है, जिससे चुनाव आयोग की तैयारियों को गति मिली है.

वहीं, उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां वितरण तो तेजी से हुआ है, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का काम सबसे धीमी गति से आगे बढ़ रहा है. आयोग ने जो आंकड़े जारी किए हैं उसके मुताबिक राज्य में 15.53 करोड़ फॉर्म बांटे जा चुके हैं जबकि इन फॉर्म में से 14.96 करोड़ फॉर्म को डिजिटल रिकॉर्ड में डाला जा चुका है. इन आंकड़ों को प्रतिशत में देखें तो 99.95 प्रतिशत फॉर्म बांटे गए जबकि 96.91 प्रतिशत फार्म का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है.

98.69% फॉर्म डिजिटल रिकॉर्ड में डाले जा चुके हैं

फॉर्म को भरने के बाद उसे डिजिटल रिकॉर्ड में डालना जरूरी है. इससे आगे होने वाली सत्यापन और डेटा अपडेट प्रक्रिया सहज और तेज बनती है. आयोग के अनुसार, अब तक 50.33 करोड़ फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, जिससे डिजिटलीकरण दर 98.69 प्रतिशत तक पहुंच गई है. यह दर बताती है कि फिजिकल फॉर्म जमा होने के तुरंत बाद उनका ऑनलाइन रिकॉर्ड बनाने पर जोर दिया जा रहा है.

डेडलाइन करीब आने के साथ राज्यों में इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल में जहां डिजिटलीकरण 99.64 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा अभी 96.91 प्रतिशत के आसपास है. मतदाताओं की अत्यधिक संख्या और भौगोलिक विस्तार के चलते यूपी में यह काम अपेक्षाकृत थोड़ा पीछे चल रहा है.

ज्यादातर राज्यों में पूरा होने वाला है टारगेट

12 राज्यों में से 9 राज्यों में फॉर्म वितरण से लेकर डिजिटलीकरण तक का काम लगभग 99 प्रतिशत के ऊपर पूरा हो चुका है. लक्षद्वीप में तो ये 100 प्रतिशत तक पूरा किया जा चुका है. मध्य प्रदेश में 99.97 प्रतिशत, अंडमान और निकोबार में 99.90 प्रतिशत, पुडुचेरी में 99.90 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 99.89 प्रतिशत, गोवा में 99.89 प्रतिशत, गुजरात में 99.68 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल 99.64 प्रतिशत, राजस्थान में 99.59 प्रतिशत जबकि तमिलनाडु में 99.27 प्रतिशत तक काम पूरा किया जा चुका है.

केरला में फॉर्म के डिजिटलीकरण का 97.42 प्रतिशत जबकि उत्तर प्रदेश में 96.91 प्रतिशत तक काम पूरा किया जा चुका है. चुनाव आयोग का कहना है कि इन राज्यों में स्थानीय परिस्थितियों और कर्मियों की सीमाओं के कारण कुछ देरी हुई है, लेकिन शेष कार्य जल्द पूरा होने की उम्मीद है.

कुछ जगहों पर SIR का काम अस्थायी रूप से रोका गया

विशेष परिस्थिति में आयोग ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान के आंकड़ों में अंता विधानसभा क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है. यहां उपचुनाव की प्रक्रिया चलने के कारण मतदाता सूची का संशोधन फिलहाल स्थगित किया गया है. उपचुनाव पूर्ण होने के बाद यहां भी पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला अभियान है SIR

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने वाली प्रक्रिया है. सही सूची से ही चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संचालित किए जा सकते हैं. चुनाव आयोग की ताजा रिपोर्ट से यह स्पष्ट है कि अधिकांश राज्यों में यह अभियान सफलता से आगे बढ़ रहा है. हालांकि कुछ राज्यों में डिजिटलीकरण धीमा है, फिर भी संपूर्ण प्रगति यह दिखाती है कि देश आने वाले चुनावों के लिए तेजी से तैयार हो रहा है. यदि निर्धारित समय में सभी राज्यों में फॉर्म वितरण और डिजिटलीकरण पूर्ण हो जाता है, तो भारत एक और सटीक, मजबूत और विश्वसनीय मतदाता सूची के साथ अगले चुनाव में प्रवेश करेगा.