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बाबर कोई मसीहा नहीं था तो मस्जिद क्यों बने

अयोध्या के इकबाल अंसारी का ताजा विवाद पर नया बयान

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बाबर कोई मसीहा नहीं था, और उसके नाम पर कोई मस्जिद नहीं बनाई जानी चाहिए। उनकी यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के बेलडांगा में निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा कथित तौर पर बाबरी मस्जिद के नाम पर एक मस्जिद का शिलान्यास करने की प्रतिक्रिया में आई है।

कबीर ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव रखी। इस घटना का समय जानबूझकर 6 दिसंबर को रखा गया था, जो अयोध्या में 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की बरसी है।

रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए, इकबाल अंसारी ने जोर देकर कहा कि 9 नवंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुनाया था, जिसके बाद देश भर के मुसलमानों ने अदालत के फैसले का सम्मान किया और शांति बनाए रखी। उन्होंने कहा, अदालत ने अपना फैसला सुनाया, और पूरे देश में एक पत्ता भी नहीं हिला। यह सबसे बड़ा सबूत है कि आज देश में इस मुद्दे को लेकर कोई विवाद नहीं है।

अंसारी ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आने के साथ ही कुछ नेता एक बार फिर मंदिर-मस्जिद की राजनीति शुरू कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अभी शुरू भी नहीं हुए हैं, और उन्हें अचानक बाबर के नाम पर मस्जिद याद आ गई है। यह सिर्फ राजनीति है। यह देश को बांटने की कोशिश है।

इकबाल अंसारी ने अपने बयान को और पुष्ट करते हुए कहा कि बाबर न तो किसी के लिए मसीहा था, और न ही उसने इस देश में लोगों, हिंदुओं, मुसलमानों या राष्ट्र के हित में कुछ किया। उन्होंने कहा, बाबर ने न तो कोई स्कूल बनवाया, न ही कोई अस्पताल बनवाया, न ही कोई विकास कार्य किया।

इसलिए, बाबर के नाम पर मस्जिद बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। अंसारी की टिप्पणी उन नेताओं को एक स्पष्ट संदेश के रूप में आती है जो चुनावी लाभ के लिए विवाद को फिर से हवा देने की कोशिश कर रहे हैं, और उन्होंने देश में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। उनका रुख देश के मुस्लिम समुदाय के एक बड़े हिस्से की भावना को दर्शाता है, जिसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार कर लिया है।