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दिल्ली में ठंड और प्रदूषण का दोहरा अटैक

सदन और अदालत में चर्चा के बाद भी राहत का इंतजाम नहीं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पिछले कुछ दिनों से प्रदूषण और शीत लहर के खतरनाक दोहरे संकट का सामना कर रहे हैं, जिससे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। दिल्ली के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के निशान को पार करते हुए गंभीर श्रेणी के ऊपरी स्तरों पर बना हुआ है। यह स्थिति मुख्य रूप से शांत हवाओं और उच्च आर्द्रता के कारण उत्पन्न हुई है, जिसने स्थानीय प्रदूषकों (वाहनों का उत्सर्जन, औद्योगिक धुआँ, और निर्माण की धूल) को निचले वातावरण में रोक दिया है। दृश्यता भी कम हो गई है, जिससे यातायात पर असर पड़ रहा है।

प्रदूषण के साथ-साथ, मैदानी इलाकों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। न्यूनतम तापमान 8 से 9 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण और ठंड का यह मिश्रण विशेष रूप से फेफड़ों की बीमारी और अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है।

प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के चरण 3 के तहत सख्त प्रतिबंधों को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इन उपायों में गैर-जरूरी निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर रोक, ईंट भट्ठों और हॉट मिक्स प्लांट्स का संचालन बंद करना, और कुछ क्षेत्रों में बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल वाहनों पर अस्थायी प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। सरकार दीर्घकालिक समाधानों के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और हरित ईंधन के उपयोग पर जोर दे रही है, लेकिन तत्काल चुनौती यह है कि प्रदूषण के इस गंभीर स्तर से नागरिकों को कैसे बचाया जाए, विशेषकर जब मौसम की स्थिति अनुकूल न हो।