Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
शादी में 7 नहीं अब होंगे 8 फेरे! बेटियों को बचाने के लिए गहोई समाज की अनोखी पहल, जानें क्या है इस 'आ... गांवों के लिए बड़ा ऐलान! अब 100 नहीं बल्कि 125 दिन की मजदूरी की गारंटी, दिल्ली नहीं सीधे गांव से होग... छतरपुर में हैवानियत! युवक को बंधक बनाकर तीन दरिंदों ने किया कुकर्म, वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर किया... भोजशाला विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट! हिंदू पक्ष की बड़ी मांग- 'जुम्मे की नमाज पर लगे तुरंत रोक', क्या... Shivpuri Theft Case: 'सोना-चांदी हमारा, बंदूक तुम्हारा...', शिवपुरी में तीन घरों में बड़ी चोरी, लेकिन... T20 World Cup 2026: दक्षिण अफ्रीका को लगा बड़ा झटका! तूफानी ऑलराउंडर डोनोवन फरेरा का टूटा कंधा, इस ख... King Movie Release Date: शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' इस दिन होगी रिलीज, सुहाना खान के साथ पहली बार बड... Spain Train Accident: स्पेन में दो हाई स्पीड ट्रेनों की टक्कर, 20 यात्रियों की मौत, घायलों की संख्या... JioMart Quick Commerce: रिलायंस ने लॉन्च की सुपरफास्ट डिलीवरी सर्विस, अंबानी के नए दांव से Blinkit, ... BSNL Recharge Plan: मात्र ₹99 में 14 दिन की वैलिडिटी, अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और डेटा; सेकेंडरी सिम के...

गुजरात एटीएस द्वारा जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़

पाकिस्तान से संचालित हो रही थी सारी गतिविधियां

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने एक बड़े जासूसी और हनी-ट्रैप नेटवर्क का पर्दाफाश करके राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस नेटवर्क को कथित तौर पर सीमा पार की खुफिया एजेंसियों द्वारा संचालित किया जा रहा था, और इसका उद्देश्य भारतीय सेना से संवेदनशील जानकारी प्राप्त करना था।

एटीएस ने इस मामले में एक सेवारत सूबेदार रैंक के सैन्यकर्मी सहित एक महिला और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। जाँच के अनुसार, महिला आरोपी ने सूबेदार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से अनाम चैट ऐप्स, के माध्यम से फँसाया। यह महिला खुद को एक उच्च-प्रोफाइल सरकारी कर्मचारी या रक्षा विश्लेषक के रूप में प्रस्तुत करती थी।

एक बार जब सूबेदार को फँसा लिया गया, तो महिला और उसके सहयोगियों ने आपत्तिजनक निजी तस्वीरों और वीडियो का उपयोग करके उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। बदले में, सूबेदार को सैन्य ठिकाने, तैनाती, उपकरणों की आवाजाही और संचार प्रोटोकॉल से संबंधित अत्यंत गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए मजबूर किया गया।

यह जानकारी हवाला चैनलों के माध्यम से भुगतान किए गए धन के बदले में दी जाती थी। एटीएस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सैन्य विशेषज्ञों ने इस घटना को एक गंभीर चेतावनी माना है, जो दिखाता है कि कैसे दुश्मन एजेंसियाँ साइबर स्पेस का उपयोग करके व्यक्तिगत स्तर पर सुरक्षाकर्मियों को लक्षित कर रही हैं। सेना ने अपने कर्मियों को सोशल मीडिया पर गोपनीयता और सतर्कता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं, जबकि इस घटना के बाद, आंतरिक सुरक्षा ऑडिट भी शुरू कर दिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अन्य कोई कर्मी इस प्रकार के जाल में न फँसें।