इमरान के मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार बैक फुट पर आयी
इस्लामाबादः पाकिस्तान में पिछले कुछ घंटों में राजनीतिक, सुरक्षा और स्वास्थ्य के मोर्चों पर कई महत्वपूर्ण घटनाएँ सामने आई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से संबंधित एक मानवीय घटनाक्रम में, उनकी बहन उजमा खान को जेल में उनसे मिलने की अनुमति दी गई। इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से उनके समर्थकों द्वारा किए जा रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच, सरकार को यह अनुमति देने के लिए जनता के दबाव के आगे झुकना पड़ा। यह घटनाक्रम न केवल खान परिवार के लिए एक राहत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जनता की आवाज़ पाकिस्तानी राजनीति में अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक है।
सुरक्षा के मोर्चे पर, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक बड़ा आतंकवादी हमला हुआ है। इस हमले में एक असिस्टेंट कमिश्नर सहित चार लोगों की मौत हो गई, जिससे क्षेत्र में एक बार फिर अस्थिरता और हिंसा का माहौल बन गया है। पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियाँ इस हमले के पीछे के तत्वों की तलाश कर रही हैं, लेकिन यह घटना देश की आतंकवाद विरोधी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस तरह के लक्षित हमले यह दर्शाते हैं कि प्रतिबंधित समूहों की गतिविधियाँ अभी भी पूरी तरह से नियंत्रित नहीं हो पाई हैं।
इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक गंभीर संकट सामने आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता व्यक्त करते हुए बताया है कि पाकिस्तान में एचआईवी (एचआईवी) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और यह देश की सबसे तेज़ी से फैल रही महामारी बनती जा रही है। डब्ल्यूएचओ ने इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है और पाकिस्तानी सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने का आग्रह किया है। विशेष रूप से, असुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं और ब्लड ट्रांसफ्यूजन को इस वृद्धि का मुख्य कारण माना जा रहा है। सरकार को अब जागरूकता अभियान और उपचार कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि इस स्वास्थ्य संकट को रोका जा सके।