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अच्छे मच्छरों की फौज अब बुरे मच्छरों पर कब्जा करेगी

ब्राजील की प्रयोगशालाओं से एक बहुत अच्छी खबर आयी

  • विषाणुयुक्त मच्छरों की आबादी रोकते हैं

  • अगली पीढ़ी में जेनेटिक गुण चला जाता है

  • वोल्बैकिया बैक्टीरिया के जरिए रास्ता निकाला

राष्ट्रीय खबर

रांचीः हाल ही में ब्राजील के कुरितिबा शहर में दुनिया की सबसे बड़ी मच्छर बायो फैक्ट्री का उद्घाटन हुआ, जिसने जैव-तकनीकी की दुनिया में एक नई उम्मीद जगाई है। वोल्बिटो डो ब्राजील नामक यह फैक्ट्री, पारंपरिक कीटनाशकों पर निर्भरता को खत्म करते हुए, खतरनाक मच्छर जनित बीमारियों जैसे डेंगू, जीका और चिकनगुनिया से लड़ने के लिए एक अभिनव और टिकाऊ समाधान पेश कर रही है।

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इस पहल के केंद्र में वोल्बैकिया नामक एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला बैक्टीरिया है। यह बैक्टीरिया कीटों की लगभग 60 फीसद प्रजातियों में पाया जाता है, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, डेंगू फैलाने वाले मुख्य मच्छर एडीज एजिप्टी में यह आमतौर पर नहीं होता। वैज्ञानिकों ने इसी प्राकृतिक तंत्र का उपयोग किया है। फैक्ट्री में, एडीज एजिप्टी मच्छरों को नियंत्रित वातावरण में पाला जाता है और उन्हें कृत्रिम रूप से वोल्बैकिया बैक्टीरिया से संक्रमित किया जाता है। ये अच्छे मच्छर किसी भी तरह की बीमारी नहीं फैलाते। वोल्बैकिया बैक्टीरिया मच्छर के भीतर डेंगू, जीका और चिकनगुनिया के वायरस को पनपने और मनुष्यों तक पहुँचने से रोकता है।

फैक्ट्री में तैयार किए गए इन लाखों वोल्बैकिया-संक्रमित मच्छरों को उन क्षेत्रों में छोड़ा जाता है जहाँ जंगली और रोगग्रस्त मच्छरों की आबादी अधिक है। जब ये अच्छे मच्छर जंगली मच्छरों के साथ प्रजनन करते हैं, तो वोल्बैकिया बैक्टीरिया आनुवंशिक रूप से अगली पीढ़ी के मच्छरों में स्थानांतरित हो जाता है।

समय के साथ, वोल्बैकिया-संक्रमित मच्छरों की संख्या पूरे क्षेत्र में बढ़ती जाती है, जिससे पूरे मच्छर समुदाय की रोग फैलाने की क्षमता समाप्त हो जाती है। यह एक सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और आत्मनिर्भर तरीका है, जो एक बार स्थापित हो जाने पर स्वयं ही बीमारी के चक्र को तोड़ देता है। वोल्बिटो डो ब्राजील फैक्ट्री की उत्पादन क्षमता अविश्वसनीय है। यह हर सप्ताह 10 करोड़ (100 मिलियन) से अधिक मच्छरों के अंडे तैयार करने में सक्षम है। इन मच्छरों को पालने के लिए नियंत्रित तापमान और नमी बनाए रखी जाती है, और उन्हें तेज़ी से प्रजनन के लिए विशेष रूप से संसाधित घोड़े का खून पिलाया जाता है।

ब्राजील ने 2024 में डेंगू की भयंकर महामारी झेली थी, इसलिए यह तकनीक देश के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। परीक्षणों में यह रणनीति पहले ही डेंगू के मामलों में 69 फीसद तक की कमी लाने में प्रभावी सिद्ध हो चुकी है। यह पहल केवल ब्राजील के लिए ही नहीं, बल्कि दुनिया के उन सभी देशों के लिए एक मॉडल है जो मच्छर जनित बीमारियों के निरंतर खतरे का सामना कर रहे हैं। यह अच्छे मच्छरों की फैक्ट्री न केवल एक वैज्ञानिक सफलता है, बल्कि यह दिखाती है कि जैव-तकनीक और प्रकृति के सहयोग से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा कैसे की जा सकती है।

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