Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
भविष्य की वायरलेस तकनीक में अधिक रफ्तार होगी मलेशिया से आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों पर बयान वक्फ संशोधन विधेयक भी गरमी बढ़ेगी अपने अंतरिक्ष अभियान को धीमा करने को तैयार नहीं इसरो असम ने गौरव गोगोई के खिलाफ भेजी रिपोर्ट Telangana: ज्योतिबा फुले की प्रतिमा में तोड़फोड़ पर बवाल, महाराष्ट्र के मंत्री ने अमित शाह को लिखा प... Delhi Politics: AAP का बीजेपी पर बड़ा हमला, दिल्ली में भाजपा के 1 साल के कार्यकाल को बताया 'फ्रॉड डे... दिल्ली की सड़कों पर संग्राम! सौरभ भारद्वाज और AAP कार्यकर्ताओं की पुलिस से भिड़ंत, हिरासत में लिए गए... हिंदुओं की दरअसल चार श्रेणियां हैः भागवत रेखा गुप्ता का 'मिशन दिल्ली'! 1 साल में खर्च किए 250 करोड़, रिपोर्ट कार्ड पेश करते समय क्यों हुईं भा...

ऑस्ट्रेलिया की संसद में बुर्के को लेकर विवाद

चेहरा ढंकने के सवाल पर बढ़ गये हैं देश के सांसद

कैनबेराः ऑस्ट्रेलिया की संसद में बुर्का और चेहरा ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब ऑस्ट्रेलिया की दक्षिणपंथी सीनेटर पॉलिन हैन्सन  ने सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की अपनी मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए स्वयं सोमवार को पूरी तरह से बुर्का पहनकर संसद में प्रवेश किया। सीनेटर हैन्सन का यह कदम एक प्रतीकात्मक विरोध था, जिसका उद्देश्य इस बात पर जोर देना था कि सार्वजनिक जीवन में चेहरे को ढकना सुरक्षा और सामाजिक सामंजस्य के लिए खतरा पैदा करता है।

जैसे ही उन्होंने संसद के भीतर बुर्का पहनकर कदम रखा, राजनीतिक गलियारों में हंगामा मच गया। कई सांसदों ने उनके इस कृत्य को विवादास्पद और भड़काऊ बताया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी के रूप में देखा। सीनेटर हैन्सन की पार्टी, वन नेशन, लंबे समय से इस तरह के प्रतिबंधों की मांग कर रही है, उनका तर्क है कि सुरक्षा कारणों से लोगों की पहचान स्पष्ट होनी चाहिए और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

हालांकि, आलोचकों का मानना है कि यह कदम इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देता है और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है, खासकर मुस्लिम महिलाओं के उन अधिकारों का जो अपनी आस्था के तहत ऐसा परिधान पहनना पसंद करती हैं। स्पीकर को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने संसदीय नियमों की समीक्षा करने का आश्वासन दिया। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच के जटिल संतुलन पर एक महत्वपूर्ण बहस को फिर से शुरू करती है।

इस मुद्दे ने पूरे देश में एक व्यापक चर्चा छेड़ दी है, जिसमें नागरिक अधिकार समूह, धार्मिक नेता और आम जनता सभी अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। सरकार को अब एक ऐसा रास्ता खोजना होगा जो सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करे और साथ ही सुरक्षा चिंताओं को भी संबोधित करे। सीनेटर हैन्सन का यह कृत्य निश्चित रूप से ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में एक ध्रुवीकरणकारी क्षण बन गया है, जो देश के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने पर दबाव डाल रहा है।