टैरिफ युद्ध की वजह से बिगड़े कूटनीतिक संबंधों का असर
बर्लिनः वैश्विक सेमीकंडक्टर या चिप्स की आपूर्ति श्रृंखला में एक नया और गंभीर व्यवधान पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है। एशिया के एक प्रमुख चिप निर्माता देश में चल रहे ऊर्जा संकट और ट्रेड यूनियन विवादों के कारण कई बड़ी चिप फैक्ट्रियों ने अस्थायी रूप से उत्पादन धीमा कर दिया है।
सेमीकंडक्टर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार हैं, जिनका उपयोग स्मार्टफ़ोन, कंप्यूटर, कारों और सैन्य उपकरणों से लेकर घरेलू उपकरणों तक हर चीज़ में होता है। एशिया के इस प्रमुख विनिर्माण केंद्र में, अचानक बिजली कटौती और एक बड़े ट्रेड यूनियन द्वारा बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल के कारण उत्पादन की गति धीमी हो गई है। यह देश दुनिया के लगभग 40% उच्च-स्तरीय चिप्स का उत्पादन करता है।
उत्पादन में यह गिरावट पहले से ही चिप की कमी से जूझ रहे वैश्विक उद्योगों के लिए एक बड़ा झटका है। विशेष रूप से, ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है। विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि यह व्यवधान कुछ दिनों से अधिक समय तक चला, तो इससे वैश्विक स्तर पर उत्पाद की कीमतों में वृद्धि हो सकती है और कई उत्पाद, जैसे नई कारें और प्लेस्टेशन कंसोल, खरीदने के लिए और भी मुश्किल हो सकते हैं।
कंपनियों ने अब अपने स्टॉक का प्रबंधन शुरू कर दिया है, और कुछ ने तो लागत बचाने के लिए उत्पादन की प्राथमिकताएं भी बदल दी हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ की सरकारें इस स्थिति पर करीब से नज़र रख रही हैं, क्योंकि सेमीकंडक्टर की कमी उनकी आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर जोखिम बन चुकी है। वे अपनी घरेलू चिप उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं, लेकिन इस बीच, एशिया से होने वाले वर्तमान व्यवधान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नाजुकता को उजागर कर दिया है। इस संकट को टालने के लिए तत्काल समाधान खोजना आवश्यक है।