Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Karnataka IPL Ticket Row: आईपीएल ओपनिंग मैच के लिए हर विधायक को मिलेंगे 2 VIP टिकट, डीके शिवकुमार की... India on Hormuz Crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य से 4 भारतीय जहाज सुरक्षित भारत पहुंचे, विदेश मंत्रालय ने ... Middle East Crisis India: मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत सरकार की पैनी नजर, राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बन... Indian Railways Alert: सावधान! चेन पुलिंग करने वालों पर रेलवे का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन, दर्जनों ग... Live-in Relationship Law India: नैतिकता अपनी जगह, पर विवाहित पुरुष का लिव-इन में रहना जुर्म नहीं- हा... Rekha Gupta Attacks AAP: दिल्ली विधानसभा में सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा हमला, अधूरे प्रोजेक्ट्स और देन... दाहोद से हुंकार: 'सरकार ने आदिवासियों को किया दरकिनार', सीएम मान और केजरीवाल का गुजरात सरकार पर सीधा... बड़ी खबर: जेवर एयरपोर्ट से उड़ान भरने के लिए 20 दिन पहले बुक करें टिकट, फ्लाइट शेड्यूल को लेकर आई ये... PM Modi on West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संकट पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक, पीएम मोदी बोले- 'टीम इ... Bhopal Crime News: भोपाल में 6 साल की मासूम पर तलवार से हमला, नानी के घर जाते समय हुआ हादसा

सऊदी अरब को दिया प्रमुख गैर नाटो सहयोगी का दर्जा

इजरायल की नाराजगी को नजरअंदाज किया डोनाल्ड ट्रंप ने

वाशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब को प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा देने की घोषणा की है। यह घोषणा एक प्रमुख अमेरिकी-सऊदी फोरम में की गई, जहां रक्षा समझौतों और एक ट्रिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा भी हुई। इस कदम को मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों को मजबूत करने और ईरान के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ मुलाकात के बाद यह बड़ा ऐलान किया। प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी का दर्जा अमेरिका के साथ रक्षा और सुरक्षा सहयोग में सऊदी अरब को विशेष लाभ प्रदान करेगा। इसमें उन्नत अमेरिकी रक्षा प्रौद्योगिकियों तक पहुंच, संयुक्त सैन्य अनुसंधान और विकास, और सैन्य ऋण कार्यक्रमों में प्राथमिकता शामिल है। ट्रंप ने इस मौके पर सऊदी अरब के साथ कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करने की घोषणा की, जिसमें पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की आपूर्ति भी शामिल हो सकती है।

इस घोषणा का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभाव को फिर से स्थापित करना है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, यह निर्णय विवादों से परे नहीं है, क्योंकि मानवाधिकार समूहों ने सऊदी अरब के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर चिंता जताई है।

कुछ अमेरिकी सांसदों ने भी इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा है कि यह दर्जा देने से पहले मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए था। इस घटनाक्रम का इज़रायल और भारत पर भी प्रभाव पड़ने की संभावना है, क्योंकि यह क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। भारत और अमेरिका पहले से ही रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं, लेकिन सऊदी अरब को इस विशेष दर्जा मिलने से नई क्षेत्रीय गतिशीलताएं बनेंगी।