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अफीम की खेती के खिलाफ झारखंड पुलिस की मुहिम

पुलिस मुख्यालय के अधिकारी भी अब इलाकों का दौरा करेंगे

  • राज्य के आठ जिलों पर खास फोकस है

  • यह मादक की खेती का मौसम चल रहा है

  • नये इलाकों की जानकारी जुटा रही है पुलिस

राष्ट्रीय खबर

रांचीः राज्य में अफीम की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को एक बार फिर तेज कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने अफीम की खेती के लिए बदनाम आठ प्रमुख जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है, जहाँ से मादक पदार्थों की तस्करी के सर्वाधिक मामले सामने आते रहे हैं। इन जिलों में चतरा, खूंटी, हजारीबाग, रांची ग्रामीण, सरायकेला-खरसावां, लातेहार, पलामू और चाईबासा शामिल हैं।

अफीम की खेती का मौसम सामान्यतः अक्टूबर से जनवरी तक होता है, और नवंबर के अंतिम सप्ताह में फसलों में फूल और फल आने शुरू हो जाते हैं। इसी संवेदनशील स्थिति को देखते हुए, नवंबर के अंतिम सप्ताह से उपरोक्त सभी जिलों में एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य न केवल अवैध खेती को नष्ट करना है, बल्कि तस्करों और उनके सहयोगियों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाना भी है।

फिलहाल, प्री-कल्टिवेशन ड्राइव (खेती-पूर्व अभियान) और खुफिया सर्वेक्षण (सर्वे) जारी है। पुलिस अपने गुप्त स्रोतों के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या तस्करों ने पिछली कार्रवाई के स्थानों को छोड़कर अफीम की खेती के लिए कोई नई जमीन या क्षेत्र तो नहीं खोज लिया है।

इस रणनीति के तहत, सीआईडी के आईजी (अपराध अनुसंधान विभाग के महानिरीक्षक) असीम विक्रांत मिंज 19 नवंबर को चतरा में आला अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे, जिसमें बोकारो के जोनल आईजी भी उपस्थित रहेंगे। इसके बाद आईजी का अफीम प्रभावित जिलों का दौरा भी शुरू होगा।

अपनी बैठकों के दौरान, आईजी मिंज पूर्व में अफीम की खेती के विरुद्ध दर्ज मामलों की वर्तमान स्थिति, सभी थानों के माध्यम से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की प्रगति, और अवैध खेती के विनष्टीकरण की स्थिति का जायजा लेंगे। वह डेढ़ महीने पहले गृह सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा करेंगे। गृह सचिव ने पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी कड़ा अभियान चलाने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि जिन स्थानों पर पहले खेती नष्ट की गई थी, वहाँ पुन: खेती न हो, और तस्करों ने कोई नया ठिकाना न बनाया हो।

इससे पहले, सीआईडी की अनुशंसा पर गृह सचिव वंदना दादेल ने सभी संबंधित उपायुक्तों (डीसी) को खेती विनष्टीकरण के लिए अतिरिक्त मशीनें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। उन्होंने संबंधित बीडीओ (प्रखंड विकास अधिकारी), सीओ (अंचल अधिकारी) और वन विभाग के अधिकारियों को भी भूमि की पहचान करने में सहयोग करने को कहा था ताकि अभियान को प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा, अवैध खेती के लिए प्रेरित करने वाले और फंडिंग करने वाले लोगों को भी चिह्नित करने पर जोर दिया गया है, ताकि उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा सके और तस्करी की जड़ पर प्रहार किया जा सके।