Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Assembly Special Session: मातृशक्ति के सम्मान में विधानसभा का विशेष सत्र; CM बोले- महिलाओं के लिए एक... Mahtari Vandan Yojana: महतारी वंदन KYC पर छत्तीसगढ़ में सियासी बवाल; कांग्रेस का आरोप- 5 लाख महिलाओं... Bhilai Crime: भिलाई में सरकारी नौकरी के नाम पर 16 लाख की ठगी; फर्जी जॉइनिंग लेटर थमाकर बेरोजगारों को... Railway Station Redevelopment: अब एयरपोर्ट जैसा दिखेगा आपका रेलवे स्टेशन; हाई क्लास सुविधाओं से होगा... MP-CG Weather Update: गरियाबंद में मौसम का यू-टर्न! चिलचिलाती धूप के बीच जमकर बरसे ओले, सफेद रंग में... CGBSE Result 2026: दिव्यांग छात्रों ने रचा इतिहास! प्रदेश के इकलौते आवासीय ब्लाइंड स्कूल के सभी छात्... Bore Basi Diwas: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर भूपेश बघेल ने खाया 'बोरे बासी'; सुशासन तिहार पर साधा ... Bhopal Crime News: भोपाल में बीटेक छात्र से घर में घुसकर लूट; मारपीट के बाद लैपटॉप और मोबाइल छीन ले ... Narsinghpur Bus Accident: इंदौर से सीधी जा रही बस नरसिंहपुर में पलटी; नीलगाय को बचाने के चक्कर में ह... Jabalpur Cruise Tragedy: आखिरी सांस तक ममता का पहरा! मलबे में बच्चे को सीने से लगाए मिली मां की लाश,...

केरल में वन्यजीव व्यापार और अंधविश्वास का काला सच

सेवानिवृत्त वन अधिकारी की पुस्तक में नया खुलासा हुआ

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः तिरुअनंतपुरम से आई खबर के अनुसार, केरल के पूर्व उप वन संरक्षक जे.आर. अनी ने अपनी नई पुस्तक नागमणि, गजमुथु, वेल्लिमूंगा: वनम कल्लाकड़थिनते कानप्पुरंगल (नाग मणियाँ, हाथी मोती, उल्लू: वन्यजीव तस्करी का अनछुआ पहलू) में केरल के अंदर वन्यजीव व्यापार के गुप्त और खतरनाक संसार का एक सचित्र वर्णन प्रस्तुत किया है।

यह पुस्तक वन विभाग के गोपनीय अभियानों पर दुर्लभ प्रकाश डालती है, जो पश्चिमी घाट में शिकारियों और तस्करों को पकड़ने के लिए किए गए थे। लेखक ने अपने कार्यकाल के दौरान फ्लाइंग स्क्वाड के प्रभागीय वन अधिकारी के रूप में किए गए उच्च जोखिम वाले मिशनों को साझा किया है।

इसमें कोझिकोड की एक अँधेरी कार्यशाला में टाइगर की खाल के एक व्यापारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए सादे कपड़ों में वन अधिकारियों के इंतज़ार का रोमांचक किस्सा शामिल है। अनी बताते हैं कि कैसे कई कथित ‘टाइगर खालें’ वास्तव में रंगी हुई मवेशी की खालें थीं, जिन्हें भोले-भाले खरीदारों को धोखा देने के लिए पेंट किया गया था। इस पुस्तक में साइलेंट वैली के घने, मोबाइल कनेक्टिविटी रहित और बारिश से भीगे जंगलों के अंदर एक सशस्त्र शिकारी से टाइगर की खाल बरामद करने जैसे खतरनाक मिशन भी शामिल हैं।

अनी ने केझा वासु और करडी राघवन जैसे कुख्यात शिकारियों के साथ हुई मुठभेड़ों और वायनाड से तमिलनाडु तक फैले हाथी दांत तस्करी के जटिल नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है। वह वन्यजीव से जुड़े अंधविश्वास और धोखाधड़ी के काले पक्ष को उजागर करते हैं।

वह बताते हैं कि कैसे लालची खरीदारों को नकली नाग मणियाँ, हाथी मोती और ‘चावल खींचने वाले’ बर्तन जैसी वस्तुएँ बेची जाती थीं, जो पारंपरिक उपचार या गुप्त शक्तियों की आड़ में अवैध वन्यजीव व्यापार और वित्तीय शोषण का माध्यम बन जाती थीं। यह किताब केरल में वन्यजीव व्यापार के क्रूर और धोखे भरे सच को सामने लाकर समाज को जागरूक करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।