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तेलंगाना के नक्सल पीड़ित और सामाजिक कार्यकर्ताओं की अपील, माओवादी छोड़े हथियार, लोकतंत्र के बने भागीदार

बस्तर : भारत देश के अलग-अलग राज्यों में नक्सल दंश के पीड़ित आज भी रह रहे हैं. माओवाद का दंश झेल चुके तेलंगाना राज्य के 15 पीड़ित और 15 जागरुक नागरिक मंगलवार को बस्तर में थे. इस दौरान नागरिकों ने माओवादियों से तीन अपील की. नागरिकों ने हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने और छत्तीसगढ़ राज्य को विकसित करने की अपील माओवादियों से की है.

नक्सल पीड़ित परिवारों को कार्यक्रम में बुलाया : शिक्षक वेंकटेश्वर रेड्डी ने बताया कि इन दिनों लगातार माओवादी जंगल से बाहर आकर हथियार छोड़ रहे हैं. कई माओवादी अभी भी जंगल में हथियार लेकर घूम रहे हैं. जिसे लेकर नेरेटिव संस्था ने कार्यक्रम आयोजित करके तेलंगाना के लोगों को निमंत्रण पत्र भेजा. इस कार्यक्रम में 30 की संख्या में अलग-अलग क्षेत्र से 15 नक्सल पीड़ितों के साथ शिक्षक, शोधकर्ता, किसान और छात्र पहुंचे.

सरेंडर कर चुके नक्सलियों से अपील : रेड्डी के मुताबिक कुछ समय पहले 210 माओवादियों ने पुलिस के सामने हथियार छोड़ा है. सरेंडर करने वाले नक्सलियों में सीसी मेम्बर आसन्ना उर्फ टकल्लापल्ली वासुदेव राव तेलंगाना राज्य के निवासी हैं. वहीं मल्लोजला वेणुगोपाल उर्फ सोनू दादा तेलंगाना के निवासी हैं. ऐसे टॉप लीडरशिप पोलित ब्यूरो या सेंट्रल कमेटी मेम्बर तेलंगाना से आए हैं जिन्होंने हथियार छोड़ा है. उनसे अपील है कि वे अन्य माओवादियों को भी संविधान के अनुसार सामने आने के लिए कहे.

वेंकटेश्वर रेड्डी ने कहा कि तेलंगाना के अर्बन माओवादी और सहयोगी अपने बेटा-बेटी को हैदराबाद ही नहीं बल्कि विदेश के बड़े यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे हैं. लेकिन आप जंगल में जीवन काट रहे हैं. बाहर आकर संविधान और लोकतांत्रिक तरीके से काम करें. क्योंकि छत्तीसगढ़ अभी 25 साल का युवा राज्य है. ऐसे में माओवाद का दंश रहने से विकास नहीं होगा. लोकतांत्रिक तरीके से बाहर आकर विकसित छत्तीसगढ़ में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें.