सीमा विवाद पर जारी शांति वार्ता में कोई प्रगति नहीं
इस्लामाबादः पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण सीमा पर संघर्ष में खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई है। इस्तांबुल में दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता चल रही थी, लेकिन उसके बावजूद अफगान सीमा (डूरंड रेखा) पर भीषण झड़पें हुईं, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान ने 5 सैनिकों के मारे जाने का दावा किया है। पाकिस्तान सरकार ने इन मौतों के लिए अफगान सुरक्षा बलों या सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है।
यह घटना दोनों देशों के बीच संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही है, जो पहले से ही सीमा नियंत्रण, आतंकवादियों की आवाजाही और शरणार्थियों के मुद्दे को लेकर तनावग्रस्त हैं। पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकवादी समूह अफगान धरती का उपयोग करके पाकिस्तान के अंदर हमले कर रहे हैं। हालांकि, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।
हिंसक झड़पों के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान को एक खुली धमकी जारी करते हुए कहा कि अगर समझौता नहीं, तो खुला युद्ध…। इस तरह की कड़ी भाषा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संकट को दर्शाती है। पाकिस्तान सीमा पर अपनी सेना की तैनाती बढ़ा रहा है, जबकि अफगानिस्तान भी सीमा सुरक्षा को मजबूत कर रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को डर है कि यह सीमा विवाद जल्द ही एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकता है, जिसके क्षेत्रीय स्थिरता पर विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। इस तनाव के कारण व्यापार मार्ग बाधित हुए हैं और मानवीय संकट गहराने की आशंका है। शांति वार्ता का विफल होना और वरिष्ठ मंत्रियों द्वारा युद्ध की धमकियाँ देना दर्शाता है कि कूटनीति के माध्यम से इस मुद्दे को सुलझाने के प्रयास संकट में हैं।