प्रतिरक्षा सहिष्णुता की खोज पर यह सम्मान
स्टॉकहोल्मः 2025 का फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार अमेरिका के मैरी ई. ब्रंको और फ्रेड राम्सडेल और जापान के शिमन सकागुची को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया है। उन्हें यह सम्मान परिधीय प्रतिरक्षा सहिष्णुता की खोज के लिए दिया गया है।
नोबेल जूरी ने सोमवार को घोषणा की कि इन तीनों वैज्ञानिकों के शोध ने इस बात की मूलभूत समझ प्रदान की है कि प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रण में कैसे रखा जाता है। उनकी खोजें विशेष रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली की उन कोशिकाओं पर केंद्रित हैं जिन्हें नियामक टी कोशिकाएं कहा जाता है। ये टी कोशिकाएं शरीर को ऑटोइम्यून रोगों से बचाती हैं।
ऑटोइम्यून रोग ऐसी बीमारियाँ हैं जिनमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही स्वस्थ ऊतकों और कोशिकाओं पर हमला करना शुरू कर देती है। मधुमेह, मल्टीपल स्केलेरोसिस और रुमेटीइड गठिया कुछ सामान्य ऑटोइम्यून रोग हैं।
पुरस्कार विजेता वैज्ञानिकों के काम से पता चला है कि नियामक टी कोशिकाएं एक प्रकार की पुलिस की तरह कार्य करती हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को बहुत अधिक आक्रामक होने और शरीर पर हमला करने से रोकती हैं। ब्रंको और राम्सडेल ने एक ऐसे आनुवंशिक उत्परिवर्तन की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो नियामक टी कोशिकाओं के कार्य को बाधित करता है, जिससे ऑटोइम्यून रोग होते हैं। सकागुची ने इन नियामक टी कोशिकाओं के कार्य और महत्व की पहचान और विवरण देने में मौलिक योगदान दिया।
इस खोज का चिकित्सा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नियामक टी कोशिकाओं को समझने से वैज्ञानिकों और चिकित्सकों को ऑटोइम्यून रोगों के इलाज और रोकथाम के लिए नए तरीके विकसित करने में मदद मिली है। यह खोज भविष्य में कई प्रकार के ऑटोइम्यून विकारों और संभवतः प्रत्यारोपण अस्वीकृति के उपचार के लिए नई दवाएँ और चिकित्सा पद्धतियाँ विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नोबेल समिति ने कहा कि यह शोध जीवन बचाने और लाखों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की क्षमता रखता है।