देश के साथ साथ रांची में भी नकली कारोबार तेजी पर
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छोटे कारखानों में बनती है दवाएं
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असली का लेबल लगाते हैं अपराधी
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सस्ते दाम पर दुकानों में आपूर्ति होती है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः पहले कोलकाता, फिर दिल्ली और अब रांची में भी एक जैसी शिकायत मिलने लगी है। बड़ी और नामी कंपनियों की दवाइयों के नाम पर यहां भी नकली दवा का कारोबार पनप गया है। इसकी शिकायत मिलने के बाद झारखंड में अब नकली दवाओं के कारोबार पर लगाम कसने के लिए एक बड़ी मुहिम शुरू हो गई है।
राज्य में कई सालों से चल रहे इस अवैध धंधे ने स्वास्थ्य व्यवस्था को खतरे में डाल दिया था। इन नकली और घटिया दवाओं को महंगी और अच्छी कंपनियों के नाम पर बेचा जा रहा था, जिससे मरीजों की जान को खतरा हो रहा था।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है। उन्हें कई दवा कंपनियों और आम लोगों से शिकायतें मिली थीं कि बाजार में उनके ब्रांड के नाम पर नकली दवाएं बेची जा रही हैं। ये नकली दवाएं गुणवत्ता के मानकों पर बिल्कुल भी खरी नहीं उतरतीं। इनमें दर्द निवारक, बुखार, शुगर, थायरॉयड, गर्भनिरोधक और विटामिन सप्लिमेंट्स जैसी जरूरी दवाएं भी शामिल थीं। इन दवाओं में न तो सही मात्रा में दवा के सक्रिय तत्व थे और न ही इनकी कोई गुणवत्ता थी, जिससे मरीज ठीक होने के बजाय और बीमार पड़ रहे थे।
इससे पहले कोलकाता और दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में हुई जांच में भी घटिया स्तर की दवाइयों का पता चला था। बाद में यह दवा किस माध्यम से अस्पताल तक पहुंचायी गयी थी, इसका राज आखिरकार राज ही रह गया। स्थानीय स्तर की बात करें तो कई बार खुद मरीज भी दवा लेने के बाद फायदा नहीं होने से हैरानी में पड़ जाता है।
इस धंधे को चलाने वाले कुछ लोग छोटे-छोटे कारखानों में घटिया सामग्री से दवाएं बनाते थे और उन पर बड़े और जाने-माने ब्रांडों के लेबल लगा देते थे। इससे न केवल इन कंपनियों की साख खराब हो रही थी, बल्कि उनका बाजार हिस्सा भी घट रहा था। सबसे ज्यादा नुकसान मरीजों का हो रहा था, जिन्हें महंगे दामों पर नकली दवाएं बेची जा रही थीं।
इन शिकायतों पर स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन लिया है। विभाग ने सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को सतर्क कर दिया है और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे बाजार में संदिग्ध दवाओं के नमूने इकट्ठा करें। इन नमूनों को तुरंत जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा। अगर लैब की रिपोर्ट में कोई भी दवा नकली या घटिया पाई जाती है, तो उस दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से न केवल अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था भी मजबूत होगी और मरीजों को सुरक्षित दवाएं मिल पाएंगी।