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प्रशांत किशोर के खुलासे से बिहार एनडीए में सीधा विवाद

आरके सिंह ने खुलासे पर नेताओं से सफाई मांगी

  • सम्राट चौधरी पर लगा है आरोप

  • जयसवाल पर पहले ही हुआ खुलासा

  • चुप्पी से जनता में गलत संदेश जा रहा

राष्ट्रीय खबर

पटना: बिहार की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने या अपने पदों से इस्तीफा देने की मांग की है।

आरके सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रशांत किशोर के इन आरोपों पर प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान पहुँचा रही है और जनता के बीच उसका ग्राफ लगातार गिर रहा है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक इन आरोपों का स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता, तब तक यह धारणा बनी रहेगी कि ये आरोप सही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा, अगर उनके पास जवाब है तो उन्हें सामने आकर देना चाहिए, अगर जवाब नहीं है तो इस्तीफा दे देना चाहिए। यह बयान इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।

प्रशांत किशोर ने पिछले सप्ताह सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल समेत कई भाजपा और जदयू नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरके सिंह ने विशेष रूप से दिलीप जायसवाल पर लगे आरोपों का जिक्र किया, जिनमें हत्या में शामिल होने और एक अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेज पर अवैध रूप से कब्जा करने की बात कही गई थी। आरके सिंह ने कहा कि दिलीप जायसवाल को इन आरोपों का या तो जवाब देना चाहिए या फिर मानहानि का मुकदमा करना चाहिए। अगर उनके पास कोई जवाब नहीं है, तो उन्हें इसे स्वीकार कर लेना चाहिए।

इसी तरह, उन्होंने सम्राट चौधरी पर प्रशांत किशोर द्वारा बार-बार लगाए जा रहे सातवीं फेल होने के आरोप पर भी अपनी बात रखी। आरके सिंह ने सुझाव दिया कि सम्राट चौधरी को सफाई देना चाहिए। आरके सिंह ने कहा कि वे इस मामले में जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार से पूरी तरह सहमत हैं, जिन्होंने भी कहा था कि आरोपों का सामने आकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने अशोक चौधरी पर लगे 200 करोड़ रुपये के आरोप का भी उदाहरण दिया।

पूर्व गृह सचिव और एक अनुभवी राजनेता होने के नाते, आरके सिंह की बातों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आरोप सही होने पर संबंधित व्यक्ति को पार्टी छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि उनकी चुप्पी पार्टी की छवि को धूमिल कर रही है। आरके सिंह के इस बयान को 2024 के लोकसभा चुनावों में उनकी अपनी हार से भी जोड़ा जा सकता है।

आरा से चुनाव लड़ते हुए उन्हें सीपीआई-एमएल के सुदामा प्रसाद से हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने तब भी शाहाबाद और मगध क्षेत्रों में भाजपा-जदयू गठबंधन के कई उम्मीदवारों की हार का कारण उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ भोजपुरी गायक पवन सिंह की निर्दलीय उम्मीदवारी को बताया था। उस घटना ने कुशवाहा वोटों को नाराज कर दिया था, जिससे भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ था। आरके सिंह का यह बयान दर्शाता है कि वे अपनी हार के पीछे के कारणों को अभी भी पार्टी की आंतरिक कमजोरियों और सही समय पर ठोस कदम न उठाने से जोड़कर देख रहे हैं।