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अस्तित्वहीन घर में एक हजार से अधिक वोटर

नये वोटरों का नाम जोड़ने में भी भारी गड़बड़ी का पता चला

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बिहार में 2,243 ऐसे पते पाए गए हैं, जहाँ प्रत्येक पर कम से कम 100 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 100 से ज़्यादा पते ऐसे हैं जहाँ 500 से ज़्यादा मतदाता हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला बिहार के मधेपुरा ज़िले के राहिजगतपुर गाँव में सामने आया, जहाँ एक ही घर नंबर 3 पर 1,069 मतदाता सूचीबद्ध हैं। यह घर वास्तव में मौजूद नहीं है। यह जानकारी महीनों तक चले विशेष गहन पुनरीक्षण के बावजूद सामने आई है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों को शुद्ध करना था।

चुनाव आयोग  के एक अधिकारी ने स्वीकार किया है कि यह समस्या एसआईआर के बाद उनके संज्ञान में आई। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि मतदाता सूचियों को ठीक करना आयोग के कानूनी दायरे से बाहर था। उन्होंने कहा कि ऐसे बदलाव केवल तभी हो सकते हैं जब मतदाता स्वयं फॉर्म 8 भरकर अपना पता बदलवाएं, या फिर मतदाता सूचियाँ पूरी तरह से नए सिरे से तैयार की जाएं।

राहिजगतपुर में यह समस्या सिर्फ एक लिपिकीय भूल नहीं है। गाँव में कई घरों के पास उचित डाक पते या मानक घर नंबर नहीं हैं। 2011 की जनगणना के दौरान अस्थायी नंबर दिए गए थे, लेकिन ग्रामीणों ने उनका उपयोग नहीं किया।

बूथ स्तर के अधिकारियों को न तो इन जनगणना नंबरों की जानकारी थी और न ही उन्हें चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए प्रशिक्षित किया गया था, जिनमें यह कहा गया था कि जहाँ कोई पता न हो, वहाँ एक काल्पनिक पता दिया जाए। यह दिशानिर्देश हाल के एसआईआर निर्देशों में एक फुटनोट के रूप में दिया गया था और इसे ठीक से लागू नहीं किया गया।

राहिजगतपुर के तीन मतदान केंद्रों में से केवल एक में ही यह समस्या है। गाँव के 74 वर्षीय काशीरानी देवी और 50 वर्षीय पंकज कुमार जैसे निवासी भी इस बात से हैरान हैं कि उनका नाम सैकड़ों अन्य लोगों के साथ एक ही पते पर कैसे आ गया। गाँव के मुखिया संदीप कुमार ने बताया कि गाँव में घर नंबरों का उपयोग करने की कोई अवधारणा नहीं है। इसी गाँव के एक बूथ लेवल अधिकारी संदीप कुमार ने भी बताया कि यह समस्या उनके पद संभालने से पहले की है और समय के साथ और भी बढ़ गई है, क्योंकि नए मतदाताओं को भी उन्हीं पते पर सूचीबद्ध कर दिया गया।

पूरे बिहार में ऐसी क्लस्टरिंग (समूहीकरण) की समस्या बड़े पैमाने पर है। नवादा में 102 सामान्य पतों पर 19,455 मतदाता पंजीकृत हैं। मटिहानी में 50 पतों पर 13,918 और औरंगाबाद में 49 पतों पर 12,486 मतदाता हैं। इसके अलावा, इन मतदाता सूचियों में वार्ड नंबर का भी उल्लेख नहीं है, जो चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार अनिवार्य है।

बीएलओ संदीप कुमार ने बताया कि वह इस समस्या को ठीक नहीं कर पाए क्योंकि उन्हें इस नियम की जानकारी नहीं थी और न ही उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें इस बारे में सूचित किया। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर के दौरान इन घर नंबरों को ठीक करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं था। मतदाता सूचियों के पहले चरण में घर-घर जाकर सत्यापन किया गया था, लेकिन फार्म में पहले से मौजूद पुराने, ग़लत पते ही थे, जिससे यह समस्या बनी रही।