Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Baba Siddique Murder Case: आरोपी आकाशदीप करज सिंह को बॉम्बे हाई कोर्ट से मिली जमानत, बड़ी राहत Sharad Pawar Health Update: शरद पवार की तबीयत बिगड़ी, सांस लेने में तकलीफ के बाद पुणे के अस्पताल में... Bihar Governance: बिहार के सामान्य प्रशासन विभाग को मिला ISO सर्टिफिकेट, सीएम नीतीश कुमार की प्रशासन... नीतीश कुमार की फिसली जुबान? राबड़ी देवी को देख बोले- 'ई जो लड़की है...', बिहार विधान परिषद में हाई व... Tarn Taran Shootout Update: प्यार में रिजेक्शन या कुछ और? लॉ स्टूडेंट की फायरिंग का वीडियो आया सामने Kanpur Lamborghini Accident: वीडियो में दिखा आरोपी शिवम, फिर FIR से नाम क्यों गायब? कानपुर पुलिस पर ... Bhopal Hospital Fraud: भोपाल के सरकारी अस्पताल में मौत का डर दिखाकर ठगी, मरीजों के परिजनों से 'इलाज'... Darbhanga News: दरभंगा में बच्ची से दरिंदगी के बाद भारी बवाल, 230 लोगों पर FIR; SSP ने दिया 'स्पीडी ... Basti Daroga Death: बस्ती से लापता दारोगा का अयोध्या में मिला शव, सरयू नदी में लाश मिलने से मची सनसन... Weather Update: दिल्ली में गर्मी या फिर लौटेगी ठंड? यूपी-बिहार में कोहरा और पहाड़ों पर बर्फबारी का अ...

संदेह को और बढ़ा दिया ज्ञानेश कुमार ने

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की, जिसमें मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करने, फर्जी मतदाताओं के आरोप और मतदाता सूची से जुड़े अन्य मुद्दे शामिल थे। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस एक दुर्लभ घटना थी, क्योंकि चुनाव आयोग आमतौर पर केवल चुनाव की घोषणा करने के लिए ही प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है।

चुनाव आयोग ने सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया। इसके पीछे उन्होंने मतदाताओं की निजता का हवाला दिया। उन्होंने पूछा कि क्या चुनाव आयोग को माताओं, बहुओं और बेटियों के सीसीटीवी फुटेज उनकी अनुमति के बिना साझा करने चाहिए। उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज केवल उन असफल चुनाव उम्मीदवारों को उपलब्ध कराए जाते हैं, जो चुनाव के नतीजों के 45 दिनों के भीतर उच्च न्यायालयों में चुनाव याचिका दायर करते हैं।

इसके बाद फुटेज को हटा दिया जाता है। कांग्रेस ने सीसीटीवी फुटेज तक आम पहुँच की मांग की थी। इसके लिए उन्होंने बेंगलुरु की एक महिला का उदाहरण दिया, जिस पर कथित तौर पर एक ही चुनाव में दो बार मतदान करने का आरोप था। हालांकि, महिला और चुनाव अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

ज्ञानेश कुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपने आरोपों को शपथ पत्र के साथ पेश करने की मांग दोहराई। राहुल गांधी ने पिछले आम चुनाव के दौरान बेंगलुरु के एक विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से ज़्यादा फर्जी मतदाताओं के होने का आरोप लगाया था। इस पर कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग सार्वजनिक बयानों का संज्ञान लेता है, लेकिन अगर आरोप डेढ़ लाख लोगों के खिलाफ हैं, तो बिना किसी सबूत या हलफनामे के उन्हें नोटिस देना उचित नहीं है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कोई व्यक्ति मतदाता सूची में कई प्रविष्टियों का आरोप लगाता है, तो उसे या तो शपथ पत्र देना होगा या देश से माफी मांगनी होगी। उन्होंने सात दिनों की समय-सीमा भी तय की और कहा कि अगर इस अवधि में शपथ पत्र नहीं दिया जाता है, तो आरोप निराधार माने जाएंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि एक ही मतदाता का कई बार पंजीकरण तब हो सकता है जब कोई मतदाता अपना निवास स्थान बदलता है और नए पते पर पंजीकरण करवाता है, लेकिन उसका पिछला पंजीकरण नहीं हटाया जाता। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

केवल तकनीक के भरोसे नाम हटाना गलत होगा। पत्रकारों ने सीईसी से पूछा कि राहुल गांधी को शपथ पत्र पर शिकायत दर्ज कराने के लिए नोटिस क्यों जारी किया गया, जबकि भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए थे, को क्यों छोड़ दिया गया। इस पर कुमार ने कहा, शिकायत करना एक बात है, भ्रम फैलाना दूसरी बात है, और चुनाव आयोग पर आरोप लगाना एक और बात है।

उन्होंने बताया कि राहुल गांधी को मतदाता पंजीकरण नियम 20(3)(बी) के तहत शपथ पत्र पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कहा गया था। फर्जी पते के आरोपों पर कुमार ने कहा कि अनधिकृत बस्तियों और बेघर लोगों के लिए, जहाँ दरवाज़े के नंबर मौजूद नहीं हैं, वहां कंप्यूटरकृत पंजीकरण फॉर्म में काल्पनिक नंबर दिए जाते हैं।

महाराष्ट्र में मतदाता सूची में असामान्य रूप से ज़्यादा पंजीकरण के आरोपों पर उन्होंने कहा कि पार्टियों ने मतदाता सूची मिलने पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी और न ही हारने वाले उम्मीदवारों ने अदालत का रुख किया। मशीन-पठनीय मतदाता सूची की राहुल गांधी की मांग पर कुमार ने कहा कि इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर एपिक नंबर डालकर खोजा और डाउनलोड किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने यह पाया था कि मशीन-पठनीय मतदाता सूची देने से मतदाताओं की निजता का उल्लंघन हो सकता है, इसलिए यह निषिद्ध है।

ज्ञानेश कुमार ने कुछ सवालों के टालमटोल भरे जवाब दिए, जिनमें ये प्रश्न शामिल थे, बिहार की मौजूदा मतदाता सूची में कितने गैर-दस्तावेजी अप्रवासी पाए गए?, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए कितने मतदाताओं ने दस्तावेज़ों के साथ अपने गणना फॉर्म जमा किए? उन्होंने इन सवालों के जवाब में कहा कि यह प्रक्रिया विकेन्द्रीकृत है और एसडीएम (उप-विभागीय मजिस्ट्रेट) स्तर पर विचाराधीन है। 30 सितंबर तक इस पर निर्णय आ जाएगा।

अंत में, एक अनुत्तरित प्रश्न यह रहा कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू करने से पहले राजनीतिक दलों से परामर्श क्यों नहीं किया। कुल मिलाकर मुख्य चुनाव आयोग और मौजूद दोनों अन्य चुनाव आयुक्त जनता का यह विश्वास और पुख्ता कर गये कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से ही यह सारा खेल हुआ है और राहुल गांधी पर जिम्मेदारी डालकर आयोग अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है।