Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
सारंगढ़ के उफनते घोघरा नाले में बही कार! पति-पत्नी लापता, चालक ने कूदकर बचाई जान जांजगीर में नशे में धुत युवक पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ा, नीचे कूदने की धमकी से मचा हड़कंप राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव ने रचा इतिहास! राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जीता रजत पदक, उठाया 199... कोरबा में किस्तों पर ली बाइक चोरी होने पर युवक ने की खुदकुशी! परिजनों ने पुलिस पर लगाए लापरवाही के आ... रायपुर में 5 हजार मीटर रीडरों का जोरदार प्रदर्शन, पूर्व CM भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में डंगनिया बि... एमसीबी के चिरमिरी में रिहायशी इलाके में घुसा जंगली भालू, घर लौट रहे युवक पर किया जानलेवा हमला बलौदाबाजार की सीमेंट कंपनियों पर बरसे शैलेश नितिन त्रिवेदी; बाहरी लोगों को नौकरी देने और स्थानीय छंट... 'विकसित छत्तीसगढ़ विजन 2047' के तहत प्रदेश बनेगा देश का अग्रणी स्पोर्ट्स हब, डिप्टी सीएम अरुण साव ने... छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर पर CSPDCL का बड़ा सर्वे! जुलाई में 28 से 53% तक घटी बिजली खपत, भ्रांतियां... रायपुर में साइबर ठगी की रकम से खरीदे सोने के सिक्के, पुलिस ने 3 शातिर आरोपियों को किया गिरफ्तार

पाकिस्तान और चीन से लोहा लेने की एक नई तैयारी

तोपखाना बटालियन बना रही भारतीय सेना

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पाकिस्तान और चीन से लोहा लेने के लिए सेना एक नई तोपखाना बटालियन बना रही है। देश में बनी इस होवित्जर तोप को ड्रेस कोड, एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) से लैस किया जा रहा है। सैन्य उत्पादन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नारे का एक बेहतरीन उदाहरण इस बार सेना के हाथ में आने वाला है। और इसका इस्तेमाल करने के लिए कई नई तोपखाना बटालियनों का गठन किया जा रहा है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, एटीएजीएस से लैस बटालियनों को 2027 की शुरुआत में पाकिस्तान और चीन सीमा पर तैनात किया जाना शुरू हो जाएगा। 95 प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से बनी यह होवित्जर तोप 48 किलोमीटर तक की दूरी तक मार करने में सक्षम है। इस तोप में ऑक्सिलरी पावर मोड, स्वचालित कमांड और नियंत्रण प्रणाली है।

इस होवित्जर की तकनीक में एक वायरलेस अत्याधुनिक संचार प्रणाली भी शामिल है। जिसके जरिए युद्ध के मैदान में मौजूद प्रत्येक तोप विशेष तकनीक के जरिए स्वचालित नियंत्रण प्रणाली से जुड़ी होती है। इसके साथ ही रात के अंधेरे में दुश्मन का पता लगाने के लिए आवश्यक नाइट विजन तकनीक भी है।

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) द्वारा विकसित 155 मिमी इस तोप के बारे में मार्च में औपचारिक निर्णय लिया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि भारतीय सेना के लिए 7,000 करोड़ रुपये की लागत से 307 एटीएजीएस खरीदे जाएंगे।

इसके साथ ही इन्हें ले जाने में उपयुक्त 327 टोड व्हीकल्स भी खरीदे जाएंगे। भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को उत्पादन का ठेका मिल रहा है। डीआरडीओ और पुणे के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट द्वारा विकसित हॉवित्जर के-9 वज्र और धनुष को पहले ही भारतीय सेना के शस्त्रागार में जगह मिल चुकी है। सेना इन तोपों के इस्तेमाल से संतुष्ट है। उस अनुभव के आधार पर, इस बार एटीएजीएस का नवीनतम संस्करण खरीदा जा रहा है।