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मतदाता सूची पुनरीक्षण के आदेश से और असमंजस

लोगों को समझ में नहीं आ रहा कैसे फॉर्म भरे

  • राहुल गांधी ने पहले लगाया है आरोप

  • राजद और टीएमसी ने विरोध दर्ज किया

  • आम मतदाता समझ ही नहीं पा रहे हैं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बिहार में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण 28 जून को शुरू हुआ है, जो 2003 के बाद पहली बार है। इसका उद्देश्य 30 सितंबर तक अद्यतन मतदाता सूची प्रकाशित करना है। हालांकि, यह प्रक्रिया शुरू से ही असमंजस और विवादों से घिरी हुई है। मतदाताओं में भ्रम की स्थिति है, जैसा कि सारण जिले के चंद्र मोहन सिंह के मामले से स्पष्ट होता है, जिन्हें दिए गए फॉर्म का उद्देश्य ही समझ नहीं आया।

इस पुनरीक्षण को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता जोड़ने और अल्पसंख्यक वोटों को हटाने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि पहले मतदाता जोड़े जाते थे, अब काटे जा रहे हैं। उनका यह भी मानना है कि यह बिहार में भाजपा की हार के संकेतों को दर्शाता है, क्योंकि 2014 के बाद से भाजपा मोदी के नाम पर और ‘राष्ट्रवाद’ के मुद्दे पर चुनाव जीतती आई है, लेकिन अब ये मुद्दे कमजोर पड़ गए हैं।

चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव से ठीक पहले, सिर्फ एक महीने (25 जून से 26 जुलाई) में 243 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 8 करोड़ मतदाताओं के सत्यापन का अभियान शुरू किया है। इस प्रक्रिया में मोबाइल पर मैसेज भेजकर वेरिफिकेशन किया जा रहा है, जिस पर कई सवाल उठ रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बिहार में 8 करोड़ मोबाइल हैं।

क्या वोटर लिस्ट में मोबाइल नंबर होते हैं? फोन पर जानकारी साझा करने के खिलाफ साइबर क्राइम की चेतावनियों के बीच यह प्रक्रिया साइबर अपराध को बढ़ावा नहीं देगी? चुनाव आयोग ने सीसीटीवी फुटेज का रिकॉर्ड 45 दिन बाद नष्ट करने का भी फैसला किया है, जिसे राहुल गांधी ने सबूत नष्ट करना बताया है।

इस अभियान को भारत के लोकतंत्र में सबसे बड़ा फ्रॉड बताया जा रहा है। आशंका है कि 1 अगस्त तक लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएंगे। चुनाव आयोग ने नए मतदाता पहचान पत्र बनाने पर रोक लगा दी है और कहा है कि जिनका वेरिफिकेशन नहीं होगा उनके वोटर आईडी अवैध माने जाएंगे।

सबसे बड़ी चिंता उन मतदाताओं को लेकर है जिन्हें जन्मतिथि प्रमाण पत्र या माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, खासकर ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि के लोगों के लिए यह मुश्किल होगा। विपक्ष का मानना है कि यह केवल मुस्लिमों के वोट काटने के लिए नहीं, बल्कि दलित और पिछड़े वर्ग के वोटों को भी लक्षित किया जा रहा है, जिन्होंने हाल ही में भाजपा से दूरी बनाई है।