लड़ाकू विमानों की कमी को दूर करने की नई पहल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और अमेरिका की अग्रणी रक्षा कंपनी जी ई एयरोस्पेस भारत में जेट इंजन के संयुक्त उत्पादन के लिए सहयोग करने जा रही है। यह डील मार्च 2026 तक फाइनल होने जा रही है। इस साझेदारी के तहत एफ-414 जेट इंजन बनाने की अत्याधुनिक तकनीक भारत को हस्तांतरित की जाएगी। ये इंजन भारत के अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट मार्क-2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को शक्ति प्रदान करेंगे।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, जी ई एयरोस्पेस के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा पूरी हो चुकी है और अब दोनों पक्ष वाणिज्यिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अब टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के सिद्धांतों पर चर्चा हो रही है। करीब 80 फीसदी तकनीक भारत को हस्तांतरित की जाएगी। ये चर्चाएं अब लगभग पूरी हो चुकी हैं। अब वाणिज्यिक पहलुओं पर आगे चर्चा होगी। मार्च तक डील फाइनल होने की संभावना है।
एफ-414 इंजन अमेरिका, स्वीडन और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया भर के कई देशों के लड़ाकू विमानों को शक्ति प्रदान करता है। इसलिए इस परियोजना में भारत के लिए अमेरिका के साथ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौता करना बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब तक अमेरिका अपनी रक्षा प्रौद्योगिकी में सख्त नियंत्रण नीति अपनाता रहा है।
इस इंजन का इस्तेमाल एएमसीए परियोजना में भी किया जाएगा। जीई के इंजन न केवल तेजस एमके-2 को शक्ति प्रदान करेंगे, बल्कि भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर प्रोटोटाइप एएमसीए में भी इस्तेमाल किए जाएंगे। इस संबंध में एचएएल और जीई एयरोस्पेस के बीच बैठकें चल रही हैं। यह सौदा भारत के तेजस कार्यक्रम और महत्वाकांक्षी एएमसीए परियोजना के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तेजस एमके-2, एमके-1ए से कहीं अधिक शक्तिशाली होगा, जिसमें बेहतर इंजन, अधिक हथियार क्षमताएं, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक एवियोनिक्स होंगे। फिलहाल, भारतीय वायुसेना करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये की लागत से करीब 180 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान खरीद रही है, जो सिंगल इंजन वाला होगा और पुराने हो चुके मिग-21 विमानों की जगह लेगा। इसके अलावा, भारत एएमसीए पर भी काम कर रहा है, जो एक मध्यम वजन का डीप-पेनेट्रेशन स्टील्थ लड़ाकू विमान होगा।