Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
सावन पुत्रदा एकादशी कब है? जानें 23 अगस्त 2026 की सही तिथि, पूजा विधि और संतान प्राप्ति के सिद्ध मंत... ब्रेड से बनाएं ये 5 क्रिस्पी और टेस्टी स्नैक्स: बच्चों और बड़ों के नाश्ते के लिए आसान और हेल्दी रेसि... कश्मीर पर अमेरिका की नीति में बड़ा बदलाव: श्रीनगर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, अलगाववाद को दरक... विशाखापत्तनम में भोजन की तस्वीरों पर छिड़ा सियासी संग्राम, सपा ने लगाया मांसाहार का आरोप चाणक्यपुरी में पाकिस्तान को कड़ा संदेश: हाई कमीशन के बाहर अवैध निर्माण पर गरजा बुलडोजर, सिविक एजेंसी... शिवपुरी के नरवर में शराब कंपनी के मैनेजर की गोली मारकर हत्या: कैशियर और कर्मचारी पर केस दर्ज, रास्ते... उज्जैन में जुटेगी देश की युवा शक्ति: 17 से 19 सितंबर तक गीता भवन में 'युवा धर्म संसद-2026', 24 राज्य... इंदौर हाईकोर्ट का अहम फैसला: मकान मालिक तय करेगा अपनी जरूरत, किराएदार नहीं उठा सकता सवाल; खाली करना ... ग्वालियर: मुरार जिला अस्पताल की न्यूरो ओपीडी में दवाओं का संकट, पर्चा लेकर निजी मेडिकल स्टोर जाने को... भोपाल के बिलखिरिया में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म: पड़ोसी युवक ने किया ब्लैकमेल, केस दर्ज होने के बा...

मैच फिक्सिंग के अपने आरोप पर कायम है राहुल गांधी

वीडियो फुटेज संरक्षण संबंधी नियम बदलने के बाद भी आरोप

  • हर बार बचने के लिए नियम बदल रहे हैं

  • मतदाता सूची अब तक क्यों नहीं दी गयी

  • यह स्थिति लोकतंत्र के लिए जहरीला है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः चुनाव आयोग द्वारा वीडियो फुटेज नष्ट करने के आदेश के बाद राहुल गांधी ने फिर से चुनाव फिक्स करने का आरोप लगाया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतदान के वीडियो फुटेज के भंडारण में बदलाव को मैच फिक्सिंग का सबूत बताया है। वोटर-लिस्ट को वे मशीन-पठनीय प्रारूप में नहीं देंगे।

सीसीटीवी फुटेज? उन्होंने उन्हें छिपाने के लिए नियम बदल दिए। मतदान की तस्वीरें और वीडियो? एक साल नहीं, ये 45 दिनों में नष्ट हो जाएंगे, राहुल ने एक्स पर लिखा। जिन्हें जवाब देना चाहिए था, वे खुद सबूत मिटा रहे हैं। यह स्पष्ट है कि मैच फिक्स है और फिक्स चुनाव लोकतंत्र के लिए जहरीला है।

गत 6 सितंबर, 2024 को, केंद्रीय चुनाव पैनल ने राज्य चुनाव निकायों को चुनाव प्रक्रिया के वीडियो फुटेज को तीन महीने से एक साल तक संग्रहीत करने की सलाह दी थी। तीन महीने बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने 1961 के चुनाव संचालन नियमों में संशोधन किया, जिसमें चुनाव से संबंधित कुछ दस्तावेजों को सार्वजनिक निरीक्षण से सुरक्षित रखा गया।

संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। पिछले साल महाराष्ट्र राज्य चुनावों के बाद से राहुल ने बार-बार चुनाव आयोग में पारदर्शिता की कमी के बारे में बात की है, चुनावों के नतीजों और बड़ी संख्या में मतदाताओं को जोड़ने पर सवाल उठाए हैं। इस महीने की शुरुआत में लोकसभा में विपक्ष के नेता द्वारा लिखे गए एक लेख में राहुल ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को, जिसमें कांग्रेस की करारी हार हुई थी, चुनाव आयोग की तोड़फोड़ द्वारा सक्षम औद्योगिक पैमाने पर धांधली से जुड़ा एक फिक्स मैच बताया था।

राहुल ने लिखा, फिक्सिंग करने वाला पक्ष भले ही कोई गेम जीत जाए, लेकिन संस्थानों और नतीजों में लोगों के विश्वास को अपूरणीय क्षति होती है। मैं छोटे पैमाने पर धोखाधड़ी की बात नहीं कर रहा हूं, बल्कि हमारे राष्ट्रीय संस्थानों पर कब्जा करने वाली औद्योगिक धांधली की बात कर रहा हूं।

रायबरेली से कांग्रेस सांसद ने चुनाव आयोग से पिछले साल के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से पहले महाराष्ट्र में मतदाता सूची सौंपने की मांग की है, जो कुछ ही महीनों के भीतर हुए थे। मजेदार बात है कि तमाम किस्म के खंडनों के बाद भी चुनाव आयोग ने राहुल के मूल सवाल का उत्तर अब तक नहीं दिया है।

राहुल ने लिखा, 2019 के विधानसभा चुनावों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 8.98 करोड़ थी, जो पांच साल बाद मई 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए 9.29 करोड़ हो गई। लेकिन महज पांच महीने बाद, नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों तक यह संख्या बढ़कर 9.70 करोड़ हो गई। पांच साल में 31 लाख की गिरावट, फिर पांच महीने में 41 लाख की छलांग।

यह उछाल इतना अविश्वसनीय था कि 9.70 करोड़ पंजीकृत मतदाता महाराष्ट्र में सरकार के अपने अनुमान के अनुसार 9.54 करोड़ वयस्कों से भी अधिक थे। चुनाव आयोग ने राहुल के दावों को पूरी तरह से बेतुका और कानून के शासन का अपमान बताते हुए खारिज कर दिया था।