ओसामा बिन लादेन को छिपाये रखा तो क्या हुआ। काफी दिनों से मददगार रहा है। चीन और इंडिया के धमकाने के लिए जो प्यादा अमेरिका ने पाल रखा है, उसे इसी नजरिए से देखने की जरूरत है। असली कंफ्यूजन भी अब खुद अपने डोनाल्ड ट्रंप ने दूर कर दिया। उन्होंने भी लंच पर नये नये फील्ड मार्शल बने मुनीर को बुलाकर यह साबित कर दिया कि दरअसल पाकिस्तान की सत्ता किसके पास है।
इसलिए अब यह मसला भी साफ हो गया कि इमरान खान जो आरोप लगा रहे थे, वह दरअसल कुछ मायने में सही था और उसे हटाने के पीछे जो खेल हुआ, उसमें अपने अंकल सैम के लोग भी शामिल थे। इसलिए सिर्फ ओसामा बिन लादेन को लिए पाकिस्तान को कोसना अमेरिका के लिए मुनासिब नहीं है। जब अफगानिस्तान में रूस के खिलाफ विद्रोही खड़े हो रहे थे तो उन्हें हथियार भी अमेरिका ही दे रहा था औऱ यह सारा असला बारूद पाकिस्तान के रास्ते ही अफगानिस्तान जा रहा था। बाद में तालिबान ने पलटी मार कर अमेरिका पर ही आतंकी हमला कर दिया तो क्या हुआ।
ध्यान से पूरी दुनिया की हालत पर गौर करें तो जहां जहां संघर्ष अथवा गृहयुद्ध की स्थिति है, वहां वहां अमेरिकी हथियार ही इस्तेमाल होते हुए नजर आते हैं। यह अलग बात है कि कुछ देशों ने अब अमेरिकी हथियारों की नकल कर अपनी फैक्ट्री खोल ली है। इस बात पर गौर करना होगा कि अमेरिका की आमदनी का मुख्य जरिया ही हथियार है।
अगर दुनिया में हथियारों की होड़ कम हो जाए तो अमेरिकी उद्योग क्या करेंगे। उनके यहां भारत जैसा देसी पापड़ बनाने या अचार डालने का घरेलू उद्योग तो चल नहीं सकता। इसलिए अगर किसी को शह देकर अपने हथियारों की दुकानदारी चलती है तो चलती रहे। माल अंदर आना चाहिए।
सुना है ट्रंप भइया इनदिनों नोबल शांति पुरस्कार पाने का जुगाड़ भिड़ा रहे हैं। फोन पर हुई बातचीत में तो उन्होंने नरेंद्र मोदी जी को अमेरिका आने का न्योता दिया था। पर अपने मोदी जी होशियार निकले। उन्होंने जेलेंस्की का ब्हाइट हाउस में जो हाल हुआ था, उसे देखा और समझा था। प्यार से मना कर दिया और खुद चले आये भगवान जगन्नाथ की शऱण में। ऐसा तो मोदी जी ने खुद कहा है। इसी बात पर अब अमेरिका और पाकिस्तान को बिना वजह कोसना बंद कर दीजीए।
इसी बात पर फिल्म याराना का यह गीत याद आ रहा है। इस गीत को लिखा था अंजान ने और संगीत में ढाला था राजेश रोशन ने। इसे किशोर कुमार ने अपना स्वर दिया था, जिसे अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।
तेरे जैसा यार कहाँ कहां ऐसा याराना आ आ
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफ़साना
तेरे जैसा यार कहाँ कहां ऐसा याराना आ आ
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफ़साना
मेरी ज़िन्दगी सवारी मुझको गले लगाके
बैठा दिया फलक पे मुझे खात से उठाके
मेरी ज़िन्दगी सवारी मुझको गले लगाके
बैठा दिया फलक पे मुझे खात से उठाके
यारा तेरी यारी को मैंने तो खुदा माना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफ़साना
मेरे दिल की यह दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वह दिन कभी न आये
मेरे दिल की यह दुआ है कभी दूर तू न जाए
तेरे बिना हो जीना वह दिन कभी न आये
तेरे संग जीना यहाँ तेरे संग मर जाना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफ़साना
तेरे जैसा यार कहाँ कहां ऐसा याराना
याद करेगी दुनिया तेरा मेरा अफ़साना
तेरे जैसा यार कहाँ कहां ऐसा याराना
चलते चलते सिर्फ एक कंफ्यूजन है कि बांग्लादेश का फिर क्या होगा। शेख हसीना ने कहा कि अगर सेंट मार्टिन द्वीप अमेरिका को सौंप देती तो सरकार का ऐसा तख्ता पलट नहीं होता। तख्ता तो पलटा और कुर्सी पर जो आया उसे खुद ट्रंप ही नापसंद करते हैं। अइसे में कइसे ताल मेल बैठेगा, यह देखने वाली बात होगी।
इतना समझा जा सकता है कि बांग्लादेश के मुक्तियुद्ध की कहानी को मिटाकर जो पटकथा लिखी जा रही है, वह दरअसल उन रजाकारों को महिमा मंडित करने की चाल है, जो मुक्तियुद्ध के वक्त पाकिस्तानी सेना का साथ दे रहे थे। भारत को धमकाने के लिए पाकिस्तान की मदद के लिए अमेरिका का सातवां बेड़ा भी करीब आ गया था। भला हो अपने पुराने दोस्त रूस (तब के सोवियत संघ) का, जिसने पनडुब्बियां भेजकर मदद कर दी।
खैर अपने झारखंड में इंडिया का गठबंधन का याराना जारी है लेकिन बिहार चुनाव को लेकर जो खटपट है, उसका यहां क्या असर होगा, यह देखने वाली बात होगी। बाकी राजनीति है तो इस पॉलिटिक्स में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है, यह समझने वाली बात है।