मोदी ने कहा था पानी और खून साथ साथ नहीं बह सकते
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अतिरिक्त नहरों की योजना का आकलन जारी
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नीचे के राज्यों को मिलेगा इसका अतिरिक्त पानी
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पाकिस्तान भी आसन्न संकट को लेकर चिंतित है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः सिंधु जल संधि के निलंबन से पाकिस्तान हलक सूख रहा है। पाकिस्तान सिंधु जल संधि के निलंबन को लेकर भारत को धमकाता रहा है। इस बार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस्लामाबाद की उन सभी खोखली बातों को अंगूठा दिखाकर जवाबी कदम उठाया है।
नई दिल्ली ने सिंधु बेसिन की नदियों को जोड़ने वाली संभावित नहर परियोजना का अध्ययन शुरू कर दिया है। नतीजतन, पश्चिमी पड़ोसी देश में जल संकट की आशंका तेज हो गई है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि इससे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सरकार और रावलपिंडी में सेना के जनरलों का रक्तचाप बढ़ेगा।
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजना के जरिए केंद्र सिंधु की बाईं सहायक नदी चंद्रभागा के पानी को पाकिस्तानी पंजाब प्रांत में जाने से रोकना चाहता है। इसके लिए सरकार की चंद्रभागा, बिपाशा और सतलुज को जोड़ने वाली नहर बनाने की योजना है। अगर यह परियोजना हकीकत बन जाती है तो नई दिल्ली 1.5 से 2 करोड़ एकड़ फीट पानी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे भारतीय राज्यों को दे सकेगी।
पता चला है कि नहर का खाका इसी तरह तैयार किया जा रहा है। भारत के ये राज्य, खासकर राजस्थान, पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं। पंजाब, हरियाणा और रेगिस्तानी राज्यों के किसान पानी की कमी के कारण कृषि उत्पादन में समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हालांकि, केंद्र की मोदी सरकार ने अभी तक इस पर कोई बयान नहीं दिया है।
जल शक्ति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी इस मुद्दे पर पहले ही मीडिया से बात कर चुके हैं। नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी के मुताबिक, हमारे पास जम्मू, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की नहरों के बुनियादी ढांचे का आकलन करने वाली एक टीम है। चंद्रभागा के पानी को मोड़ने की दो योजनाओं पर अध्ययन किया जा रहा है।
अंतिम रिपोर्ट जमा होने के बाद प्रस्तावित नहर परियोजना का मुख्य काम शुरू हो जाएगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि फिलहाल चंद्रभागा का कुछ पानी जम्मू, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की नहरों में लाने की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा कुछ नई नहरें काटी जाएंगी। सर्वे रिपोर्ट में यह भी बताया जाएगा कि इनसे किन इलाकों को फायदा होगा।
इसलिए केंद्र प्रस्तावित परियोजना में कोई खामी नहीं छोड़ना चाहता। नहरें काटकर चंद्रभागा का पानी दूसरी जगह भेजने का काम कतई आसान नहीं है। इसके लिए गहन आकलन की जरूरत है। अगर वहां कोई चूक हुई तो पूरी योजना धरी की धरी रह जाएगी। इस सर्वे के बाद मौजूदा नहरों में से किन नहरों के जीर्णोद्धार की जरूरत है, इसकी सूची तैयार की जाएगी।
सरकार उसी हिसाब से धन आवंटित करेगी। सूत्रों के मुताबिक चंद्रभागा-इरावदी-बिपाशा-शतद्रु जोड़ नहर परियोजना के अलावा केंद्र ने सिंधु बेसिन में जलाशयों का समूह बनाने का फैसला किया है। जल शक्ति मंत्रालय का दावा है कि सरकार सिंधु जल संधि का उल्लंघन किए बिना यह कदम उठा सकेगी।
क्योंकि संधि के अनुसार भारत को संबंधित नदियों के 20 प्रतिशत पानी का इस्तेमाल करने की अनुमति है। बदलते हालात में यह बढ़कर 40 प्रतिशत हो सकता है। शरीफ का दावा है कि भारत सिंधु संधि को निलंबित करके पानी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया है कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते। नई दिल्ली समझौते पर तभी पुनर्विचार करेगी जब इस्लामाबाद आतंकवादियों को समर्थन देना बंद कर दे।