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डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ युद्ध से डगमगाई दुनिया

वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत और वृद्धि की उम्मीदें

वाशिंगटन: पिछले कुछ वर्षों में, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में छेड़े गए टैरिफ युद्धों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को काफी हद तक डगमगा दिया था। व्यापारिक बाधाएं, अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान ने कई देशों को आर्थिक मंदी की कगार पर धकेल दिया था। हालांकि, अब हाल के आर्थिक आंकड़ों से वैश्विक अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जो पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है।

इस सकारात्मक प्रवृत्ति में कई कारकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सबसे पहले, आपूर्ति श्रृंखलाओं में सुधार हुआ है। कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद आपूर्ति श्रृंखलाओं में जो व्यापक व्यवधान आए थे, वे अब काफी हद तक सामान्य हो गए हैं, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही सुचारू हुई है और उत्पादन लागत कम हुई है।

दूसरे, उपभोक्ता खर्च में वृद्धि देखी गई है। कई देशों में लोगों ने फिर से खर्च करना शुरू कर दिया है, जिससे व्यवसायों को बढ़ावा मिला है और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है। तीसरे, कुछ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आई है। केंद्रीय बैंकों द्वारा उठाए गए सख्त मौद्रिक कदमों के परिणामस्वरूप कीमतों में वृद्धि की दर धीमी हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है और उनकी क्रय शक्ति बढ़ी है।

हालांकि, यह नहीं कहा जा सकता कि राह पूरी तरह से आसान है। अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं जो इस सुधार की गति को धीमा कर सकती हैं। भू-राजनीतिक तनाव, जैसे कि इजराइल-हमास संघर्ष और यूक्रेन में जारी युद्ध, वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।

ये तनाव तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं, व्यापार मार्गों को बाधित कर सकते हैं और निवेश के माहौल को अनिश्चित बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उच्च ब्याज दरें कई देशों में उधार लेने की लागत को बढ़ा रही हैं, जिससे निवेश और उपभोक्ता खर्च पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कुछ देशों में ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भी एक चिंता का विषय हैं, क्योंकि ये उत्पादन लागत और मुद्रास्फीति को बढ़ा सकती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक ने अपने हालिया पूर्वानुमानों में वैश्विक विकास दर में मामूली वृद्धि का अनुमान लगाया है। यह एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन दोनों संस्थानों ने आगाह भी किया है कि अनिश्चितताएं अभी भी मौजूद हैं और भविष्य की राह आसान नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था कई अप्रत्याशित झटकों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है, और किसी भी नई चुनौती का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए, निवेशकों और नीति निर्माताओं को इन चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए सावधानीपूर्वक और रणनीतिक योजना बनाने की आवश्यकता होगी। इसमें व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना शामिल है। इन प्रयासों से ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान की जा सकेगी और भविष्य की संभावित बाधाओं का सामना करने के लिए इसे बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकेगा।