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जापान को पछाड़कर चौथी अर्थव्यवस्था बना भारत

आईएमएफ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए किया गया एलान

  • 4.187 ट्रिलियन डॉलर का है आंकड़ा

  • विदेशी पूंजीनिवेश तेजी से बढ़ेंगे

  • रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आईएमएफ की अप्रैल 2025 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की नॉमिनल जीडीपी 4.187 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जो जापान की अनुमानित जीडीपी 4.186 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक है। यह उपलब्धि मजबूत घरेलू मांग, अनुकूल जनसांख्यिकीय रुझानों और नीतिगत सुधारों के कारण है। भारत की अर्थव्यवस्था 6-7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर बनाए हुए है, जबकि जापान की अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यापार तनाव और नीतिगत बदलावों के कारण प्रभावित हुई है।

भारत का चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना वैश्विक स्तर पर कई प्रभाव डालेगा। इसमें से एक प्रमुख प्रभाव होगा भारत का वैश्विक मंचों जैसे जी 20 और आईएमएफ में बढ़ता प्रभाव। इससे भारत की वैश्विक नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका होगी और वह अपने आर्थिक हितों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकेगा। अभी हाल ही में आईएमएफ ने भारत की सलाह को दरकिनार कर पाकिस्तान को कर्ज दिया है पर विरोध को देखते हुए इस कर्ज में कई नई शर्तें भी लगायी हैं

भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) में और वृद्धि होगी, क्योंकि वैश्विक कंपनियां भारत को एक आकर्षक बाजार के रूप में देख रही हैं। यह निवेश न केवल आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

भारत और जापान के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी, जैसे कि चंद्रयान-5 और सैन्य सहयोग, भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देगी। यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

भारत इस उपलब्धि के बाद वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दिशा में और करीब आ गया है। अगर भारत 2028 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देता है, तो नेतृत्व और मजबूत होगा। इससे भारत को वैश्विक आर्थिक नीतियों को आकार देने में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। भारत की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उपलब्धि न केवल देश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव लाएगी। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक मंच पर एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगी और वैश्विक आर्थिक नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।

आर्थिक विशेषज्ञ यह मानते हैं कि चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था से नए रोजगार सृजित होंगे, खासकर तकनीक, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में। इसके अलावा बढ़ती जीडीपी और निवेश से इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार होगा। इससे आम लोगों की आय भी बढ़ेगी और बढ़ती आय और मध्यम वर्ग के विस्तार से उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ेगी। इस दिशा में आय का असमान बंटवारा ही भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। यह माना जा रहा है कि इस कमी को दूर किये बिना महंगाई जैसी चुनौतियां बनी रह सकती हैं, जिन्हें सरकार को संबोधित करना होगा।