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पीढ़ीगत बदलाव के दौर से गुजर रहा है झारखंड मुक्ति मोर्चा

उम्मीद के मुताबिक ही कल्पना सोरेन कमेटी में

  • हेमंत के जेल में होने पर सक्रिय हुई

  • चुनाव के दौरान जबर्दस्त प्रचार किया

  • पार्टी की जीत में उनकी भी भूमिका

राष्ट्रीय खबर

रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन को भी झारखंड मुक्ति मोर्चा की कार्यसमिति में जगह दे दी गयी है। इसकी उम्मीद तो काफी पहले से ही की जा रही थी जब हेमंत के जेल में होने के दौरान खुद कल्पना सोरेन ने कमान थाम रखी थी।

इस दौरान पार्टी को अकेले अपने बलबूते पर उन्होंने न सिर्फ संगठित किया बल्कि अपने आक्रामक रवैये हताश कार्यकर्ताओं में नई जोश भरने का काम किया। इसके बाद चुनाव प्रचार के दौरान भी अत्यधिक सक्रिय रही और चुनाव परिणाम बताते हैं कि उसका अच्छा परिणाम झारखंड मुक्ति मोर्चा को मिला है।

झामुमो के महाधिवेशन के दौरान ही यह चर्चा होने लगी थी कि पार्टी की कमान कल्पना सोरेन को सौंपी जा सकती थी। लेकिन महाधिवेशन में ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई। अब नई कार्यसमिति की घोषणा से कल्पना सोरेन को विधिवत कार्यसमिति में शामिल कर लिया गया है।

इससे साफ है कि गुरुजी के समय का झामुमो अब बदलाव के दौर से गुजर रहा है और पुरानी पीढ़ी के नेताओं के साथ साथ नई पीढ़ी को भी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इस बदलाव का असर झामुमो के संगठनात्मक ढांचे पर भी पड़ेगा तथा उम्र के बोझ से दब चुके नेताओं पर पार्टी की बहुत कम जिम्मेदारी होगी। यह बोझ अब अगली पीढ़ी के कंधे पर डाल दी गयी है।

पार्टी के अध्यक्ष और सीएम हेमंत सोरेन के स्तर से कार्यालय आदेश सोमवार को जारी कर दिया गया। इसमें शिबू सोरेन को संस्थापक संरक्षक बनाया गया है जबकि हेमंत सोरेन अध्यक्ष हैं।

इसके अलावा हेमंत की मां रूपी सोरेन के अलावा नलिन सोरेन, स्टीफन मरांडी, सविता महतो, सरफराज अहमद, मथुरा प्रसाद महतो, बैद्यनाथ राम और रामदास सोरेन उपाध्यक्ष बनाये गए हैं। विनोद कुमार पांडेय और सुप्रियो भट्टाचार्य महासचिव और प्रवक्ता तथा फागु बेसरा, जोबा मांझी, मिथिलेश ठाकुर को महासचिव बनाया गया है।

नंदकिशोर मेहता, अभिषेक प्रसाद पिंटु और समीर मोहंती को सचिव पद दिया गया है। विनोद कुमार पांडेय कोषाध्यक्ष बनाए गए हैं। हेमलाल मुर्मू, कुणाल षाडंगी और मनोज कुमार पांडेय प्रवक्ता बनाये गए हैं। इसके अलावा पार्टी के विधायक, मंत्रियों, सांसदों और अन्य समेत 40 लीडरों को कार्यकारिणी सदस्य की जवाबदेही दी गई है।

इनमें हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन भी शामिल हैं। उनके अलावा भाजपा छोड़कर आयी लुइस मरांडी को भी इस कमेटी में स्थान दिया गया है। वैसे राजनीतिक हलकों में इस सूची में विधानसभा अध्यक्ष का नाम होने पर सवाल उठने लगे हैं क्योंकि यह माना जा रहा है कि इस कुर्सी पर बैठे व्यक्ति को राजनीतिक जुड़ाव से अलग रहना पड़ता है।  फिर भी यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि अब पार्टी में हेमंत सोरेन के अलावा कल्पना सोरेन की राजनीतिक ताकत भी पहले के मुकाबले अधिक हो गयी है।

हेमंत सोरेन के जेल में होने से लेकर अब तक कल्पना सोरेन ने अपने बलबूते पर इस राजनीतिक ताकत को हासिल किया है और पार्टी के नीचे से ऊपर तक के लोग इसे स्वीकार भी करते हैं। सूची से साफ है कि पार्टी के केंद्रीय कार्यालय की जिम्मेदारी अब भी मुख्य तौर पर विनोद पांडेय और सुप्रियो भट्टाचार्य के जिम्मे ही है। जो आम तौर पर राजनीतिक तौर पर बयान जारी कर पार्टी के स्टैंड को साफ किया करते हैं।