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चुनाव प्रचार में लाभ के बदले नुकसान कर गये अमित शाह, देखें वीडियो

आदिवासी नेताओं को गलत लहजे में मंच से बुलाया

  • ऐ बाबूलाल तुम आगे आओ

  • चंपई सोरेन तुम भी सामने आओ

  • घाटशिला की जनसभा का वाकया

राष्ट्रीय खबर

रांचीः भाजपा के नंबर दो नेता औऱ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह यहां के आदिवासियों, दलितों और पिछड़ों को शायद और नाराज कर गये। दरअसल एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कुछ ऐसे लहजे में कई नेताओं को पुकारा, जिससे कोल्हान क्षेत्र के अलावा भी झारखंड में तेजी से नाराजगी फैल गयी। अमित शाह के इस बयान से नाराज लोगों के बीच यह वीडियो तेजी से फैला है।

फेसबुक पर शेयर किया गया है यह वीडियो

इस वीडियो में अमित शाह यह कहते हुए सुनाई पड़ रहे हैं, ऐ बाबूलाल यहां आओ, दिनेशानंद आगे आओ, चंपई सोरेन सामने आओ। लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर है कि जिन नेताओं को वह तुम कहकर पुकार रहे हैं, उनका राजनीतिक कद अमित शाह से ज्यादा पुराना है और वरीय लोगों को तुम नहीं आप कहकर पुकारना ही सम्मान देना होता है।

इस वीडियो से राजनीतिक विरोधियों को भी प्रचार करने की खुली छूट मिल गयी है। भाजपा विरोधी लोग भी इस वीडियो के बारे में मिर्च मसाला लगाकर वोटरों के बीच इसे परोस रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि जब अमित शाह गुजरात में बहुत कम हैसियत के नेता थे उस समय झारखंड में बाबूलाल मरांडी की तूती बोलती थी और वह झारखंड के पहले मुख्यमंत्री थे।

इसी तरह झामुमो छोड़कर भाजपा में आये चंपई सोरेन का झारखंड आंदोलन से राजनीतिक कद बना है जो अमित शाह के राजनीतिक जीवन से ज्यादा पुराना है। इसी वजह से आदिवासी, दलित और पिछड़ों के बीच इस वीडियो की जबर्दस्त प्रतिक्रिया हो रही है। भाजपा को पछाड़ने की सोच रखने वाले भी इस वीडियो को अपने अपने माध्यम से फैला रहे हैं।

वैसे इस वीडियो की जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि अमित शाह जिस बाबूलाल को तुम कहकर संबोधित कर रहे थे, वह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी नहीं है। दरअसल केंद्रीय गृह मंत्री भाजपा प्रत्याशी और चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को पुकार रहे थे। इसके बाद भी कोल्हान क्षेत्र में ऐसे बयान की तीखी आलोचना हुई है और लोग इसे आदिवासियों के सम्मानपूर्वक शिष्टाचार के खिलाफ मानकर नाराज हो गये हैं।

बार बार भाजपा द्वारा हिंदू वोट एकजुट करने की कोशिशों से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि हिंदू वोटों के बिखराव से खतरा हो सकता है, इसका एहसास भाजपा नेतृत्व को है। खनिज एवं अन्य कारणों से झारखंड की अहमियत दिल्ली की नजर में अधिक होने की वजह से ही 81 सीटों वाले इस राज्य में भाजपा पूरा दम लगा रहे हैं। इसके बाद भी हेमंत सोरेन द्वारा पूर्व में लिये गये फैसले तथा हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर जेल भेजने का मामला बार बार भाजपा के रास्ते में रोड़े अटका रहा है।