यह जगजाहिर सत्य है कि कोई भी देश आतंकवाद का समर्थन नहीं करता। हमास और हिजबुल्लाह के पीछे खड़ा ईरान भी इसका कहर झेल रहा है। लिहाजा पहलगाम की आतंकी घटना के बाद केंद्र सरकार की पहल सही रास्ते पर जा रही है।
सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने ऐसे विषय पर एकजुटता का प्रदर्शन किया है। दूसरी तरफ भारत ने पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए जम्मू-कश्मीर हमले के बारे में चुनिंदा देशों के राजदूतों को जानकारी दी। भारत ने पाकिस्तान के सदाबहार मित्र चीन सहित विश्व नेताओं से समर्थन जुटाया है।
भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस्लामाबाद को अलग-थलग करने की कोशिश की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को जी-20 के चुनिंदा देशों के राजदूतों को पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द्वारा किए गए हमले के बारे में जानकारी दी।
चीन, कनाडा, जर्मनी, जापान, पोलैंड, ब्रिटेन और रूस सहित कई जी-20 देशों के राजदूत भारत के निमंत्रण पर विदेश मंत्रालय कार्यालय पहुंचे। करीब 30 मिनट तक चली बैठक में राजदूतों को पहलगाम आतंकी हमले के बारे में जानकारी दी गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपराधियों और उनके प्रायोजकों को कड़ी चेतावनी जारी करने के बाद उच्च स्तरीय राजनयिक बैठक हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के मधुबनी से अपने संबोधन के दौरान हिंदी से अंग्रेजी में बात करते हुए कहा, भारत हर आतंकवादी को खोजेगा, उसका पता लगाएगा और उसे दंडित करेगा हमलावरों और उनके समर्थकों को उनकी कल्पना से परे परिणाम भुगतने होंगे।
उन्होंने यह संदेश विश्व स्तर पर पहुँचाने के लिए कहा। अंग्रेजी में बोलने की वजह से श्री मोदी का यह संदेश सीधा वैश्विक मंच पर हुआ और लोगों ने यह मान लिया कि सिर्फ चेतावनी देने तक भारत चुप नहीं बैठेगा। मिनटों के भीतर ही, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने उनकी टिप्पणियों को उठाया और आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को और मजबूत किया।
पहलगाम नरसंहार की संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, जापान, यूएई और इजरायल सहित वैश्विक शक्तियों ने तीव्र और स्पष्ट निंदा की। वैश्विक नेताओं ने भारत के आक्रोश को दोहराया। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने भारत के साथ एकजुटता दिखाई और कड़े शब्दों में हमले की निंदा की।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट करने के बाद व्यक्तिगत रूप से पीएम मोदी को फोन करके समर्थन व्यक्त किया, संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।
हमले के समय अपने परिवार के साथ भारत में मौजूद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भारत ने अपने शब्दों, कार्यों और कूटनीतिक हमलों से पाकिस्तान और दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आतंकवाद को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा और भारत की भावना पर हमला करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक हमला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, अटारी सीमा को बंद कर दिया, सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया और पाकिस्तानी राजनयिकों को अवांछित व्यक्ति घोषित कर दिया।
भारत ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा भी रद्द कर दिए और उनके संबंधित उच्चायोगों की संख्या कम कर दी। हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद ये निर्णय लिए गए।
भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से त्याग नहीं देता, तब तक कूटनीतिक हमला जारी रहेगा।
जाहिर है कि अब दुनिया को नरेंद्र मोदी की वह बात याद आती होगी कि गुड और बैड आतंकवाद कुछ अलग नहीं होता। आतंकवाद बस आतंकवाद होता है। दरअसल वैश्विक मंच पर भारत और आगे बढ़े, यह कई देशों को पसंद नहीं है क्योंकि इससे उनके प्रभुत्व को चुनौती मिलती है।
दूसरी तरफ पाकिस्तान भी अच्छी तरह जानता है कि भारत का विरोध करते हुए ही वह पूरी दुनिया से आर्थिक मदद हासिल कर सकता है क्योंकि निरंतर सैन्य शासन के अधीन रहने की वजह से वहां की अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी है और बिना किसी झिझक के यह कहा जा सकता है कि वह दूसरों की दान पर जिंदा रहने वाले एक भीखमंगा देश है। लेकिन इसके बीच यह सवाल अनुत्तरित रह जाता है कि हम आखिर कितने दिनों तक इस आतंकवाद को झेलते रहेंगे। भारत को तो अपनी तरक्की पर भी ध्यान देना है क्योंकि वह दूसरे देशों के दान पर चलने वाला देश नहीं है। फिर भी सीमा पर जो तैयारियां चल रही है उससे उम्मीद है कि सटीक लक्ष्य पर सर्जिकल स्ट्राइक सही समय पर होगी।