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भारत जैसे सुविधाविहीन देशों में मददगार होगी यह विधि

जेनेरेटिव ए आई गैर विशेषज्ञ डॉक्टरों जैसा ही है

  • ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी की शोध है

  • चैटजीपीटी का बेहतर परिणाम पाया गया है

  • भविष्य में खुद को समृद्ध करेगी यह विधि

राष्ट्रीय खबर

रांचीः भारत अथवा इसके जैसे अनेक देश ऐसे हैं, जहां आम आदमी तक चिकित्सा सुविधा नहीं पहुंच पायी है। अपने देश की बात करें तो सैकड़ों गांव अब भी ऐसे हैं, जहां किसी के बीमार पड़ने पर उसे खटिया में लादकर मीलों पैदल चलकर अस्पताल लाना पड़ता है। ऐसे गांवों के करीब विशेषज्ञता वाले अस्पताल भी नहीं होते। इस वजह से गरीब मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है तथा उनपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस परेशानी को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है।

निदान के लिए जनरेटिव ए आई के उपयोग ने चिकित्सा क्षेत्र में ध्यान आकर्षित किया है और इस विषय पर कई शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। हालाँकि, चूँकि प्रत्येक अध्ययन के लिए मूल्यांकन मानदंड अलग-अलग थे, इसलिए यह निर्धारित करने के लिए एक व्यापक विश्लेषण की आवश्यकता थी कि वास्तविक चिकित्सा सेटिंग्स में ए आई का उपयोग किस हद तक किया जा सकता है और डॉक्टरों की तुलना में इसके क्या लाभ हैं।

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ओसाका मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ मेडिसिन में डॉ. हिरोताका ताकीता और एसोसिएट प्रोफेसर दाईजू उएदा के नेतृत्व में एक शोध समूह ने जून 2018 और जून 2024 के बीच प्रकाशित 83 शोध पत्रों का उपयोग करके जनरेटिव ए आई की नैदानिक ​​क्षमताओं का मेटा-विश्लेषण किया, जिसमें चिकित्सा विशेषताओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल थी। जिन बड़े भाषा मॉडल (LLM) का विश्लेषण किया गया, उनमें से चैट जीपीटी का सबसे अधिक अध्ययन किया गया।

तुलनात्मक मूल्यांकन से पता चला कि चिकित्सा विशेषज्ञों की निदान सटीकता जनरेटिव ए आई की तुलना में 15.8 प्रतिशत अधिक थी।

जनरेटिव एआई की औसत निदान सटीकता 52.1 प्रतिशत थी, जनरेटिव एआई के नवीनतम मॉडल कभी-कभी गैर-विशेषज्ञ डॉक्टरों के बराबर सटीकता दिखाते हैं। इस निष्कर्ष के साथ साथ हमें यह पता है कि भले ही स्वास्थ्य सेवाएं सुदूर गांवों तक नहीं पहुंची हो पर स्मार्ट मोबाइल की पहुंच ऐसे इलाकों में है।

लिहाजा ए आई का इस्तेमाल करने की जानकारी रखने वालों को प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य साथी की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

 इससे गांव में ही मरीज की परेशानी का प्रारंभिक आकलन और निदान हो पायेगा। यदि बीमारी अधिक गंभीर है तो उसे नजदीक के किस अस्पताल में किस विशेषज्ञ डाक्टर के पास पहुंचाना है, यह भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ही जानकारी दे देगा।

यह शोध दर्शाता है कि जनरेटिव एआई की निदान क्षमताएं गैर-विशेषज्ञ डॉक्टरों के बराबर हैं। इसका उपयोग चिकित्सा शिक्षा में गैर-विशेषज्ञ डॉक्टरों का समर्थन करने और सीमित चिकित्सा संसाधनों वाले क्षेत्रों में निदान में सहायता करने के लिए किया जा सकता है। डॉ. टाकिता ने कहा।

अधिक जटिल नैदानिक ​​परिदृश्यों में मूल्यांकन, वास्तविक चिकित्सा रिकॉर्ड का उपयोग करके प्रदर्शन मूल्यांकन, एआई निर्णय लेने की पारदर्शिता में सुधार और विविध रोगी समूहों में सत्यापन जैसे आगे के शोध की आवश्यकता है, ताकि एआई की क्षमताओं को सत्यापित किया जा सके। शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि जैसे जैसे इस विधि का उपयोग बढ़ेगा, ए आई अपनी जानकारी को समृद्ध करता चला जाएगा। जिसका परिणाम यह होगा कि उनके विश्लेषण की क्षमताएं और विकसित होंगी और यह मरीजों के लिए और भी ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।