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स्थगन प्रस्ताव की गंभीरता बनाए रखेः बिड़ला

सरकार विरोधी मुद्दों पर सोशल मीडिया से बढ़ी है परेशानी

  • राज्यों का मुद्दा यहां उठाना उचित नहीं

  • सदन में अध्यक्ष का निर्देश ही अंतिम

  • विपक्ष ने इस पर भी आपत्ति जतायी

नईदिल्लीः लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज गंभीर विषयों पर ही स्थगन प्रस्ताव का नोटिस देने का सदस्यों से आग्रह करते हुए कहा कि आम मुद्दों और राज्यों से संबंधित विषयों पर नोटिस देकर इसकी गंभीरता को कम नहीं करें। श्री बिरला ने प्रश्नकाल के बाद कई विपक्षी सदस्यों के कार्यस्थगन प्रस्ताव संबंधी नोटिस को अस्वीकार करते हुए यह व्यवस्था दी।

उन्होंने कहा कि कहा कि वे सदन में नोटिस आने से पहले उसे सार्वजनिक रूप से मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित-प्रसारित नहीं करें। उन्होंने सदन की गरिमा का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती अध्यक्षों द्वारा दी गई व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा, कार्यस्थगन प्रस्ताव बहुत ही असाधारण प्रावधान है जो सरकार का ध्यान तत्काल एवं लोक महत्व के मामलों की ओर आकर्षित करने के लिए लाया जाता है।

इससे जुड़ा विषय तत्काल और सार्वजनिक महत्व का होना चाहिए। अध्यक्ष ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव तब तक स्वीकार नहीं होता, जब तक सरकार संविधान और कानून द्वारा निर्धारित कर्तव्यों का पालन करने में विफल नहीं हो। उन्होंने कहा कि कि कई सदस्य रोजाना नोटिस देते हैं और कई बार तो राज्य के विषयों पर नोटिस देते हैं

यह प्रयास स्थगन प्रस्ताव की गंभीरता और उसके महत्व को कम करेगा। उन्होंने कहा कि यह भी देखा गया है कि एक ही राजनीति दल के सदस्य अलग अलग विषय पर सूचना देते हैं। अध्यक्ष की इस व्यवस्था को लेकर जब विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई तब उन्होंने कहा कभी भी अध्यक्ष के निर्देश को सदन में चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। दरअसल हाल के दिनों में महत्वपूर्ण मुद्दों पर सोशल मीडिया में पहले ही चर्चा होने तथा एक्स के चैटबॉट के उत्तरों से सत्ता पक्ष खुद को घिरा हुआ पा रहा है। इसी वजह से अब बचाव के तौर पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए बोलने से रोकने की पहल की जा रही है।