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मणिपुर से मिलते भाजपा के हालात के संकेत

मणिपुर में गुरुवार को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया, जिसके कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की राय है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसमें उस राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती।

अधिसूचना में कहा गया है, अब, इसलिए, संविधान के अनुच्छेद 356 द्वारा प्रदत्त शक्तियों और उस संबंध में मुझे सक्षम बनाने वाली अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मैं घोषणा करती हूं कि मैं भारत के राष्ट्रपति के रूप में मणिपुर राज्य सरकार के सभी कार्यों और उस राज्य के राज्यपाल में निहित या उनके द्वारा प्रयोग की जा सकने वाली सभी शक्तियों को अपने ऊपर लेता हूं। नियमों के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को भी निलंबित कर दिया गया है। मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष चल रहा है।

संघर्ष में करीब 250 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की राय है कि ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जिसमें उस राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती। अधिसूचना में कहा गया है, अब, इसलिए, संविधान के अनुच्छेद 356 द्वारा प्रदत्त शक्तियों और उस संबंध में मुझे सक्षम बनाने वाली अन्य सभी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, मैं घोषणा करती हूं कि मैं भारत के राष्ट्रपति के रूप में मणिपुर राज्य सरकार के सभी कार्यों और उस राज्य के राज्यपाल में निहित या उनके द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों को अपने ऊपर लेता हूं।

नियमों के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को भी निलंबित कर दिया गया है। मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष चल रहा है। संघर्ष में करीब 250 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।

सिंह ने 9 फरवरी को मणिपुर की राजधानी इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंपा। यह इस्तीफा राज्य विधानसभा के बजट सत्र के लिए बुलाए जाने से एक दिन पहले दिया गया था, जिसे रद्द कर दिया गया। सिंह ने अपने त्यागपत्र में कहा था, मणिपुर के लोगों की सेवा करना अब तक सम्मान की बात रही है।

मैं हर मणिपुर के हितों की रक्षा के लिए समय पर कार्रवाई, हस्तक्षेप, विकास कार्य और विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार का बेहद आभारी हूं।

सिंह का इस्तीफा पांच दिन बाद आया है, जब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय फोरेंसिक लैब को लीक हुए ऑडियो टेप पर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था, जिसमें कथित तौर पर सिंह को दिखाया गया है और जिसमें उन्हें कथित तौर पर यह कहते हुए सुना गया है कि राज्य में जातीय हिंसा उनके आग्रह पर भड़काई गई थी।

बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद से मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी के विधायक उत्तराधिकारी की तलाश में जुटे हैं। भाजपा विधायकों के समूहों ने इस सप्ताह पार्टी के उत्तर-पूर्व समन्वयक संबित पात्रा के साथ कई बैठकें कीं, लेकिन मणिपुर के अगले सीएम पर आम सहमति नहीं बन पाई।

हालांकि पार्टी या राजभवन ने कोई बयान जारी नहीं किया, लेकिन मामले से वाकिफ लोगों ने कहा कि नेताओं ने भल्ला को सूचित किया होगा कि उन्होंने सिंह के प्रतिस्थापन पर अभी फैसला नहीं किया है।

संविधान के अनुच्छेद 174 (1) द्वारा निर्धारित आसन्न समय सीमा ने भी मामले को जटिल बना दिया, जिसके अनुसार विधानसभा, जिसे पिछली बार 12 अगस्त, 2024 को स्थगित किया गया था, को छह महीने के भीतर – 12 फरवरी, 2025 को फिर से बुलाया जाना चाहिए।

इन तमाम घटनाक्रमों से साफ है कि अब खास तौर पर मणिपुर के भाजपा विधायकों पर पार्टी नेतृत्व का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। वरना पहले जो हालात थे, उसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर आये नेता जो फैसला लेते थे, उस पर सभी सहमति व्यक्त करते थे। इससे कमसे कम यह पता चला है कि मणिपुर के मामले में अमित शाह के अनुशासन का खौफ अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। कुछ ऐसे ही हालत उत्तरप्रदेश और हरियाणा में भी देखने को मिल रहे हैं, जहां के प्रदेश स्तरीय नेताओं ने अमित शाह को तरीके से किनारे लगाना प्रारंभ कर दिया है। वैसे सिर्फ मणिपुर की बात करें तो विधायकों की नाराजगी जायज भी है क्योंकि बार बार अनुरोध के बाद भी दिल्ली दरबार ने उनकी बातों पर पहले ध्यान नहीं दिया था। गनीमत है कि अमेरिका दौरे पर गये नरेंद्र मोदी से डोनाल्ड ट्रंप ने देश के अल्पसंख्यकों को मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। फिर भी यह आने वाले तूफान का स्पष्ट संकेत है।