Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में वर्चस्व की लड़ाई तेज, असली संगठन बताने को लेकर आमने-सामने आए दोनों गुट LADC नीति के विरोध में गर्माया वकीलों का आंदोलन, 27 जुलाई को लुधियाना कोर्ट परिसर में 89 अधिवक्ता बै... महिला इंस्पेक्टर से दुष्कर्म के आरोपी SI साहिबमीत सिंह पर बड़ा खुलासा, दादा और पिता भी रह चुके हैं प... मानसा में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से गैंगरेप, परिजनों की शिकायत पर 5 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज बरनाला लाठीचार्ज के विरोध में 27 जुलाई को 'पंजाब बंद' का ऐलान, जालंधर में वाल्मीकि समाज का बड़ा फैसल... श्री माता वैष्णो देवी यात्रा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, जयकारों के साथ भवन की ओर बढ़े भक्त पंजाब में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी, बिजली मंत्री के साथ 6 घंटे की मीटिंग रही पूरी तरह बेनतीज... मालिक की फोटो लगाकर 2.50 करोड़ की साइबर ठगी, लुधियाना पुलिस ने जोधपुर से आरोपी को किया गिरफ्तार लुधियाना के फेस-5 फोकल पॉइंट में अज्ञात युवक का शव मिलने से फैली सनसनी, मौके पर पहुंची पुलिस लुधियाना के 100 फुटी रोड पर युवक पर जानलेवा हमला, बातचीत के बहाने बुलाकर तेजधार हथियारों से किया लहू...

तीन तलाक पर केंद्र से मांगा आंकड़ा

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने अब केंद्र सरकार से जवाब मांगा

  • देश की वास्तविक स्थिति का पता चले

  • तीन तलाक कहना ही कानूनन दंड है

  • सभी पक्ष लिखित दलील दाखिल करें

नईदिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत प्रतिबंधित तीन तलाक के जरिए तलाक के मामलों में मुस्लिम पुरुषों के खिलाफ दर्ज मुकदमे और दाखिल आरोप पत्र की संख्या का आंकड़ा पेश करने का बुधवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने तीन तलाक को अपराध बनाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा,  अब सभी मुकदमे केंद्रीकृत हो गए हैं.. अब हमें बताएं कि कितने मामले लंबित हैं।

क्या अन्य उच्च न्यायालयों में कोई चुनौती लंबित है। श्री मेहता ने केंद्र का पक्ष रखते हुए कानून का बचाव किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए यह कानून जरूरी है। इसमें रोकथाम (तलाक) के प्रावधान हैं। इस पर पीठ ने कहा कि केंद्र ने तीन तलाक कहने के कृत्य को ही दंडित किया है।

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश अधिवक्ता निजाम पाशा ने कहा कि अब कानून के तहत केवल घोषणा करने पर भी दंड लगाया जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एम आर शमशाद ने तर्क दिया कि इस तरह के बयान और भावनात्मक हिंसा घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आते हैं।

हालांकि, श्री मेहता ने कहा,  यह ऐसा है जैसे कह दिया जाए कि अगले ही पल से तुम मेरी पत्नी नहीं हो और एक इंसान हो जिसे एक आदमी की जिंदगी और घर से भी निकाल दिया गया है। इस पर पीठ ने कहा,  हमें नहीं लगता कि घरेलू हिंसा अधिनियम इसके अंतर्गत आएगा।  पीठ ने संबंधित पक्षों से लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा।

पीठ ने श्री मेहता से ग्रामीण इलाकों के आंकड़ों सहित दर्ज मुकदमों की संख्या की जांच करने और आंकड़े देने को कहा।पीठ ने कहा,  उन्हें (केंद्र) आंकड़े दाखिल करने दें। हम वास्तविक स्थिति जान लेंगे कि क्या है। श्री पाशा ने कहा कि किसी अन्य समुदाय में परित्याग कोई अपराध नहीं है। इस पर श्री मेहता ने कहा कि अन्य समुदायों में तीन तलाक की प्रथा नहीं है।

श्री शमशाद ने दलील दी कि आपराधिक मामलों में (दिल्ली में भी) जब मारपीट आदि का गंभीर मामला होता है, तो वैवाहिक मामलों में महीनों तक मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता। उन्होंने कहा,  यहां, किसी ने तीन बार तलाक कहा है तो वह जेल जाएगा, यही मुद्दा है । अदालत ने कहा कि अधिकांश अधिवक्ता यह तर्क नहीं देंगे कि तीन तलाक सही प्रथा है। शायद वे इसके अपराधीकरण के पहलू पर बहस करेंगे। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा कि तीन तलाक की प्रथा खत्म हो चुकी है।