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कांगपोकपी पुलिस स्टेशन पर भीड़ का हमला

हिंसा पीड़ित मणिपुर में माहौल फिर से बिगड़ गया

राष्ट्रीय खबर

गुवाहाटीः मणिपुर के कुकी बहुल कांगपोकपी जिले में शुक्रवार शाम को तनाव फैल गया, जब प्रदर्शनकारियों ने इम्फाल पश्चिम की सीमा से लगे कांगपोकपी जिले के उयोकचिंग में तैनात सुरक्षा बलों को वापस बुलाने की मांग की। इस घटना में घायल होने वालों में कांगपोकपी एसपी एम प्रभाकर भी शामिल हैं।

शुक्रवार शाम को प्रदर्शनकारियों ने कांगपोकपी पुलिस स्टेशन पर धावा बोल दिया और गांव में केंद्रीय बलों खासकर बीएसएफ और सीआरपीएफ की लगातार तैनाती को लेकर गुस्से में पथराव किया। सामने आए कथित दृश्यों में से एक में कांगपोकपी एसपी प्रभाकर के सिर से खून बहता हुआ दिखाई दिया। यह अशांति कुकी-जो समूहों द्वारा उयोकचिंग के पड़ोसी गांव सैबोल में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती का विरोध करते हुए चल रही अनिश्चितकालीन आर्थिक नाकेबंदी और 24 घंटे के पूर्ण बंद के बीच हुई।

पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करके भीड़ को तितर-बितर करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे प्रदर्शनकारियों में से कई घायल हो गए। अधिकारियों द्वारा आधिकारिक बयान तैयार किए जाने तक विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है। संगठन ने कहा कि नाकाबंदी के दौरान कुकी-ज़ो आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन पर प्रतिबंध रहेगा।

आदिवासी निकाय के अध्यक्ष हेनलीएनथांग थांगलेट ने चुराचांदपुर में कहा कि अगर सुरक्षा बलों द्वारा कथित लाठीचार्ज में घायल महिलाओं को मुआवजा नहीं दिया जाता है तो कुकी ज़ो परिषद अपना विरोध तेज करेगी। अगर सरकार बफर ज़ोन की पवित्रता बनाए रखने में विफल रहती है, जो प्रशासन के हाथों में है, तो आर्थिक नाकाबंदी फिर से लागू की जाएगी।

कांगपोकपी जिले के एक गांव में महिलाओं पर सुरक्षा बलों द्वारा कथित कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को मणिपुर के कुकी-जो बसे इलाकों में एक जनजातीय निकाय द्वारा आर्थिक नाकेबंदी की गई। एक अन्य संगठन, कमिटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) ने भी 31 दिसंबर को सैबोल गांव में महिलाओं पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में जिले में 24 घंटे का बंद रखा। जनजातीय निकाय कुकी-जो काउंसिल ने कहा कि 2 जनवरी की मध्यरात्रि से शुरू हुई आर्थिक नाकेबंदी आदिवासी अधिकारों और सम्मान की अवहेलना के विरोध में शनिवार को 2 बजे तक जारी थी।