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पांच रुपया का सिक्का बंद करेगा आरबीआई !

धातु का दुरुपयोग रोकने की दिशा में सरकारी पहल अब

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः धड़ल्ले से इस मुद्रा की तस्करी चल रही है। इसे जानकर अब भारतीय रिजर्व बैंक पांच रुपए के सिक्के को बंद कर देगा। सवाल उठ रहे हैं कि क्या केंद्र इस बार पांच-टैरिफ वाले सिक्कों को भी समाप्त कर देगा? क्या भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पहले ही यह योजना शुरू कर दी है? जैसे ही सूत्रों के माध्यम से यह खबर सामने आई, देशभर में हंगामा मच गया। हालांकि, इस पर अभी तक सरकार के स्तर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

वर्तमान में बाजार में कई प्रकार के पांच के सिक्के उपलब्ध हैं। उनमें से एक मोटी धातु से बना है। केंद्रीय बैंक के सूत्रों के अनुसार मोटी धातु से बने पांच के सिक्कों का प्रचलन दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है। और यही कारण है कि रिजर्व बैंक अब मोटी धातु से बने नए पांच के सिक्के जारी नहीं कर रहा है। ज्यादातर लोग दूसरे पांच वाले सिक्कों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आरबीआई अधिकारियों का दावा है कि मोटे पांच-टैरिफ सिक्कों की बड़े पैमाने पर तस्करी शुरू हो गई है। इसे पिघलाकर ब्लेड बनाया जा रहा है, जिसकी लागत पांच रुपये से अधिक है। इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है। परिणामस्वरूप, बुलियन सिक्के को स्थायी रूप से बंद करने के निर्णय पर चर्चा चल रही है।

आरबीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर इस बारे में बात की। उनके शब्दों में, पांच रुपये का मोटी धातु के सिक्के को पिघलाकर कम से कम पांच से छह ब्लेड बनाना संभव है। यदि उनमें से प्रत्येक की लागत दो रुपये है, तो एक सिक्के से दस या बारह रुपये की आमदनी होती है। इस तरह, मुद्रा में प्रयुक्त धातु का आंतरिक मूल्य उसके मौद्रिक मूल्य से अधिक हो जाता है। एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था में ऐसा कभी नहीं होना चाहिए।

इसके अलावा पुराने पांच रुपये के सिक्के को बंद करने के पीछे एक और कारण है। यानी मोटी धातु के पांच- के सिक्कों की बड़ी मात्रा बांग्लादेश में तस्करी की जा रही है। इससे घरेलू बाजार में मुद्रा संकट पैदा हो रहा है। इससे निपटने के लिए मोटी धातु से बने पांच रुपये के सिक्कों को प्रचलन से बाहर किया जा सकता है।

हालांकि, आरबीआई की पीतल और अन्य मिश्र धातुओं से बने पांच रुपये के सिक्कों को तत्काल बंद करने की कोई योजना नहीं है। चूंकि पतले सिक्कों से ब्लेड नहीं बनाए जा सकते, इसलिए उनकी तस्करी की प्रवृत्ति काफी कम है। भारतीय बाजार में मुद्रा की आपूर्ति को रिजर्व बैंक नियंत्रित करता है। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति इस संबंध में अंतिम निर्णय लेती है।

बेशक, इस समिति को केंद्र के निर्देशों का पालन करना होगा। आरबीआई को मोटी धातु से बने पांच टायरा के सिक्कों का जारीकरण पूरी तरह से बंद करने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी। रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति अगले वर्ष फरवरी (वर्ष 2025 में) में पुनः बैठक करेगी। यह देखना अभी बाकी है कि मोटी धातु से बने पांच रुपये के सिक्के के संबंध में वहां अंतिम निर्णय लिया जाता है या नहीं।